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jaisalmer: एक बस की आग ने पूरे परिवार को मिटाया, पीछे रह गया सूना घर

जिस घर में कभी बच्चों की हंसी और किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब एक साल से सन्नाटा पसरा है। 14 अक्टूबर 2025 को हुए बस अग्निकांड ने पीर मोहम्मद के परिवार के छह सदस्यों को हमेशा के लिए छीन लिया। हादसे के एक साल बाद भी परिवार के पीछे छूटे अपनों का दर्द कम नहीं हुआ, अब उन्हें आर्थिक सहायता का इंतजार भी है।
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जैसलमेर

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Deepak Vyas

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Updated: 3 Nov 2026, 8:26 PM IST

jaisalmer

हादसे में मृतकों की फोटो

जैसलमेर. किसी घर में बच्चों की हंसी उसकी सबसे बड़ी रौनक होती है। उनकी आवाजें दीवारों से टकराकर लौटती हैं तो घर जीवंत लगता है। लेकिन भंभरा की ढाणी में एक ऐसा घर है, जहां एक हादसे ने बच्चों की आवाजें, परिवार की खुशियां और अपनों के साथ जीने की उम्मीद एक साथ छीन ली। 14 अक्टूबर 2025 को हुए बस अग्निकांड में पीर मोहम्मद के परिवार के छह सदस्य बिछड़ गए। एक साल बाद भी उस घर का सन्नाटा हादसे की भयावहता बयां करता है।

जैसलमेर मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर भंभरा की ढाणी निवासी पीर मोहम्मद 14 अक्टूबर को फसल कटाई की तैयारी के लिए जरूरी सामान लेने जैसलमेर आया था। स्कूलों में दीपावली की छुट्टियां थीं, इसलिए वह अपने बच्चों को भी शहर घुमाने ले गया। दोपहर करीब तीन बजे परिवार गांव लौटने के लिए निजी बस में सवार हुआ। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह सफर उनके जीवन का सबसे भयावह अध्याय बन जाएगा।

बच्चों के साथ परिवार भी आग की चपेट में आया

शहर से निकलने के बाद बस में आग लग गई। हादसे में पीर मोहम्मद के पांच वर्षीय बेटे इरफान और दस वर्षीय बेटी हसीना की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। पीर मोहम्मद, उसकी पत्नी इमामत, बेटा युनूस और इमामत की बहन बागा बाई गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें जोधपुर ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी भी मौत हो गई। हादसे ने परिवार के छह सदस्यों को छीन लिया। पीर मोहम्मद के साले इमादीन के अनुसार, उनकी बहन इमामत का पूरा परिवार इस दुर्घटना में खत्म हो गया। परिवार के बुजुर्ग शुराब खां के लिए अब अपनों की यादों के अलावा कुछ शेष नहीं रहा।

एक साल बाद भी सहायता का इंतजार

इमादीन का कहना है कि जिस घर में कभी बच्चों की चहल-पहल रहती थी, वहां अब लंबे समय से सन्नाटा पसरा है। परिवार की त्रासदी केवल अपनों को खोने तक सीमित नहीं है। इतने बड़े नुकसान के बाद आर्थिक सहायता नहीं मिलना उनकी पीड़ा को और बढ़ाता है। जिन लोगों के साथ भविष्य की कल्पना की थी, वे अब लौटकर नहीं आएंगे। पीछे छूटे परिजनों के लिए उनकी यादें ही बाकी हैं।