गोडावण की प्रजनन क्षमता काफी धीमी होती है और फील्ड में उसके अंडे को कई बार अन्य वन्यजीव नुकसान पहुंचा देते हैं। इस समस्या का समाधान करने के लिए वहां से अंडे को उठा कर ब्रीडिंग सेंटर का अंडा रखा जाएगा और उसकी जगह पर डमी अंडा रखा जाएगा। एक ओर ब्रीडिंग सेंटर में कृत्रिम तरीकों से अंडे से चूजा निकालने की प्रक्रिया होगी।
जैसलमेर स्थित राष्ट्रीय मरु उद्यान में राज्य पक्षी गोडावण के संरक्षण और उनकी तादाद में बढ़ोतरी के लिए नया पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसके अंतर्गत फील्ड में मिलने वाले गोडावण के अंडे को उठा कर उसके स्थान पर ब्रीडिंग सेंटर में प्राप्त होने वाले अंडे को रखा जाएगा ताकि फील्ड में अंडे को अन्य हिंसक जानवरों से बचाया जा सके। डीएनपी को वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की तरफ से यह प्रोजेक्ट चलाने की अनुमति मिल गई है। यह अनुमति 5 साल के लिए मिली है और इसके अंतर्गत 1 वर्ष में अधिकतम 5 अंडों की अदला बदली की जा सकेगी। दरअसल, गोडावण की प्रजनन क्षमता काफी धीमी होती है और फील्ड में उसके अंडे को कई बार अन्य वन्यजीव नुकसान पहुंचा देते हैं। इस समस्या का समाधान करने के लिए वहां से अंडे को उठा कर ब्रीडिंग सेंटर का अंडा रखा जाएगा और उसकी जगह पर डमी अंडा रखा जाएगा। एक ओर ब्रीडिंग सेंटर में कृत्रिम तरीकों से अंडे से चूजा निकालने की प्रक्रिया होगी। दूसरी ओर चूजे निकलने की अवधि से एक-दो दिन पहले ही ब्रीडिंग सेंटर में प्राप्त होने वाले अंडे को फील्ड में बने घोसले में रखा जाएगा, ताकि वहां मादा गोडावण के संरक्षण में चूजा बाहर आ सके। अंडा रखा रहने से मादा गोडावण के प्राकृतिक व्यवहार में भी कोई तब्दीली नहीं आती है। यह प्रयोग गत जून माह में सफलतापूर्वक किया भी गया है।
ब्रीडिंग सेंटर्स से मिलती रही है खुश खबरें
गौरतलब है कि दुर्लभ राज्य पक्षी गोडावण संरक्षण की दिशा में जैसलमेर जिले में सम और रामदेवरा स्थित ब्रीडिंग सेंटरों से एक के बाद एक खुश खबरी आती रही हैं। यहां कृत्रिम गर्भाधान और वैज्ञानिक तौर-तरीकों से सफलतापूर्वक गोडावण के चूजों का जन्म हुआ है। इस साल में दोनों सेंटरों में 10 चूजों का जन्म आधुनिक तकनीकी से हो चुका है। इसके चलते ब्रीडिंग सेंटरों में गोडावण का कुनबा निरंतर बढ़ रहा है। प्रोजेक्ट जीआइबी यानी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के तहत जैसलमेर जिले के सम और रामदेवरा में ब्रीडिंग सेंटर्स का संचालन किया जा रहा है। साल 2018 में इनकी स्थापना की गई और अब एक के बाद एक इन सेंटरों से गोडावण के जन्म की सुकून देने वाली खबरें मिल रही हैं।होंगे कई लाभडीएनपी के उप वन संरक्षक ब्रजमोहन गुप्ता ने बताया कि वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से स्वीकृति मिलने के बाद अंडों की अदला-बदली का प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। उन्होंने बताया कि इससे कई लाभ होंगे। सबसे पहले तो फील्ड में अंडे को रखे जाने का जोखिम कम होगा। इसके अलावा ब्रीडिंग सेंटर और फील्ड में अदला-बदली किए गए अंडों से निकलने वाले गोडावणों की क्षमताओं में बढ़ोतरी होगी। ब्रीडिंग सेंटर वाले अंडे से होने वाला चूजा प्राकृतिक परिस्थितियों से तालमेल बैठाने में सक्षमता हासिल कर सकेगा।