
जैसलमेर. दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बनने के बाद भारत एक ऐसे मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां विकास की असली परीक्षा जनसंख्या बढऩे से नहीं, बल्कि हर नागरिक तक अवसर पहुंचाने की क्षमता से होगी। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास, पेयजल, डिजिटल कनेक्टिविटी और पर्यावरणीय संतुलन अब केवल सरकारी योजनाओं के विषय नहीं हैं, बल्कि अगले 25 वर्षों में भारत की आर्थिक और सामाजिक ताकत तय करने वाले सबसे महत्वपूर्ण मानक बन चुके हैं। मौजूदा समय में भारत देश के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है। अनुमानित 146 करोड़ की आबादी वाले देश में लगभग 65 प्रतिशत लोग 35 वर्ष से कम आयु के हैं। यही वर्ग भारत को वैश्विक विनिर्माण, नवाचार, स्टार्टअप, डिजिटल अर्थव्यवस्था और सेवा क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है। लेकिन यदि शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार की रफ्तार धीमी रही तो यही जनसांख्यिकीय लाभ भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती भी बन सकता है।
देश में तेजी से हो रहा शहरीकरण बदलाव का सबसे बड़ा संकेत है। महानगरों के साथ अब मध्यम और छोटे शहर भी तेजी से फैल रहे हैं। नई कॉलोनियां बस रही हैं, औद्योगिक कॉरिडोर विकसित हो रहे हैं और पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था नए क्षेत्रों तक पहुंच रही है। इसके साथ ही पानी, ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवाएं, सार्वजनिक परिवहन, कचरा प्रबंधन और आवास जैसी बुनियादी जरूरतों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
जैसलमेर जिला मौजूदा परिवर्तन का सशक्त उदाहरण बनकर उभर रहा है। देश के सबसे बड़े क्षेत्रफल वाले जिले में आबादी का घनत्व कम है, लेकिन विकास की गति तेज है। विश्वस्तरीय पर्यटन, विशाल सौर ऊर्जा परियोजनाएं, सीमा सुरक्षा से जुड़ा आधारभूत ढांचा, बेहतर सडक़ नेटवर्क और बढ़ता शहरी विस्तार जिले की जरूरतों को पूरी तरह बदल रहे हैं। वर्ष 2011 की जनगणना में जिले की आबादी करीब 6.7 लाख दर्ज हुई थी, लेकिन पर्यटन सीजन में प्रतिदिन हजारों अतिरिक्त लोगों की मौजूदगी के कारण वास्तविक सेवा मांग कई गुना बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जैसलमेर जैसे रेगिस्तानी जिलों में भविष्य का विकास केवल भवन और सडक़ें बनाने से संभव नहीं होगा। हर बूंद पानी, हर यूनिट ऊर्जा, हर हेक्टेयर भूमि और हर सार्वजनिक सुविधा का वैज्ञानिक प्रबंधन ही आने वाले वर्षों की सफलता तय करेगा। यदि आज दीर्घकालिक मास्टर प्लान नहीं बने, तो बढ़ते निवेश और शहरी विस्तार के साथ संसाधनों पर दबाव भी तेजी से बढ़ेगा।
विश्व जनसंख्या दिवस की शुरुआत 1989 में हुई थी। इसकी प्रेरणा 11 जुलाई 1987 के फाइव बिलियन डे से मिली थी। आज दुनिया की आबादी 8.2 अरब के पार पहुंच चुकी है। संयुक्त राष्ट्र लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि विकास का उद्देश्य केवल जनसंख्या बढ़ाना या घटाना नहीं, बल्कि हर व्यक्ति को गरिमापूर्ण जीवन, समान अवसर और सुरक्षित भविष्य उपलब्ध कराना होना चाहिए।
भारत की अनुमानित आबादी (2025-26): करीब 146 करोड़
विश्व की आबादी: करीब 8.2 अरब
भारत में 35 वर्ष से कम आयु की आबादी: लगभग 65% (विभिन्न सरकारी व अंतरराष्ट्रीय अनुमानों के अनुसार)
जैसलमेर की जनसंख्या (जनगणना 2011): 6,69,919
जैसलमेर का क्षेत्रफल: 38,401 वर्ग किमी
21वीं सदी में किसी देश की ताकत उसकी आबादी नहीं, बल्कि उस आबादी को मिले अवसर, संसाधन और जीवन की गुणवत्ता तय करेगी। भारत के सामने यही सबसे बड़ी परीक्षा है और जैसलमेर जैसे जिले उसका भविष्य दिखा रहे हैं।
-गौरव बिस्सा, एसोसिएट प्रोफेसर