जैसलमेर

होम अष्टमी पर जैसलमेर में उमड़ी आस्था, मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़

होम अष्टमी पर जिले भर में आस्था और श्रद्धा का विशेष माहौल नजर आया। गुरुवार को सुबह से ही देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने मंदिरों में दर्शन कर हवन यज्ञ में आहुतियां दी और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
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Mar 26, 2026
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होम अष्टमी पर जिले भर में आस्था और श्रद्धा का विशेष माहौल नजर आया। गुरुवार को सुबह से ही देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने मंदिरों में दर्शन कर हवन यज्ञ में आहुतियां दी और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। शहर के प्रमुख मंदिरों में दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। सोनार दुर्ग स्थित घंटियाली देवी मंदिर, वैष्णो देवी मंदिर, गायत्री मंदिर, हिंगलाज देवी मंदिर सहित गजरूप सागर मार्ग स्थित काले डूंगरराय मंदिर, खेजड़िया, गफूर भट्टा क्षेत्र, सुखिया नाडा और पन्नोधराय मंदिरों में भी बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे। मंदिरों को आकर्षक सजावट से सजाया गया, जिससे वातावरण और भी भक्तिमय हो गया। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुष, महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे पूरे उत्साह के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हुए। होमगार्ड मंदिर में आयोजित हवन यज्ञ में श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक आहुतियां दीं। रात्रि के समय कई स्थानों पर भजन संध्या और जागरण का आयोजन हुआ, जहां देर रात तक श्रद्धालु भक्ति में लीन रहे। नवरात्रि व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं ने अष्टमी पर घरों में विधिवत पूजा-अर्चना कर हवन किया और छोटी कन्याओं को भोजन करवाकर प्रसाद वितरित किया। चैत्र शुक्ल अष्टमी पर काले डूंगरराय, गजरूप सागर, देगराय और तनोट मंदिरों में भी बड़ी संख्या में दर्शनार्थी पहुंचे। पूरे जिले में दिनभर धार्मिक कार्यक्रमों का दौर चलता रहा और वातावरण भक्ति भाव से ओतप्रोत रहा।

राम जन्मोत्सव पर यज्ञ, आरती, प्रसादी और जागरण के कार्यक्रम तय

ऐतिहासिक रामकुंडा मेला इस वर्ष भी रामनवमी के अवसर पर आयोजित होगा। मेले की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पश्चिमी राजस्थान के इस प्राचीन धार्मिक स्थल पर हर वर्ष हजारों श्रद्धालु जुटते हैं और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। रामकुंडा ट्रस्ट के अध्यक्ष थिरपालदास वैष्णव ने बताया कि रामकुंडा वैष्णव पीठ की स्थापना सत्रहवीं शताब्दी में अनंतराम महाराज ने महारावल अमरसिंह के शासनकाल में की थी। यह स्थान मरुस्थल क्षेत्र में वैदिक वैष्णव परंपरा के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हुआ। यहां भगवान विष्णु और सीताराम के प्राचीन मंदिर स्थित हैं, जिन्हें क्षेत्र के सबसे पुराने वैष्णव मंदिरों में गिना जाता है। इतिहास के अनुसार इस क्षेत्र में पहले तांत्रिक परंपरा का प्रभाव था, जिसे वैष्णव मत ने स्थापित कर धार्मिक दिशा दी। रामकुंडा पीठ ने न केवल आध्यात्मिक बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यहां गुरुकुल परंपरा के तहत विद्यार्थियों के लिए पठन-पाठन और आवास की व्यवस्था विकसित की गई थी। रामनवमी के अवसर पर सुबह मंगला आरती के बाद मंदिर के पट बंद रहेंगे। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के साथ राम यज्ञ का आयोजन होगा। दोपहर 12:15 बजे मंदिर के पट खुलेंगे और राम जन्मोत्सव मनाया जाएगा। आरती के बाद यज्ञ की पूर्णाहुति और मानस पाठ का समापन होगा। सायंकालीन आरती के पश्चात श्रद्धालुओं के लिए विशाल महाप्रसादी का आयोजन रखा गया है। इसके बाद रात्रि में भजन संध्या और जागरण का आयोजन होगा, जिसमें श्रद्धालु देर रात तक भक्ति में लीन रहेंगे। चैत्र नवरात्र के दौरान यहां अखंड रामायण पाठ और हवन का क्रम लगातार जारी रहता है। मेले में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। टेंट, पुष्प सज्जा, प्रकाश व्यवस्था और पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। शहर से मेले तक पहुंचने के लिए नि:शुल्क बस सेवा भी उपलब्ध रहेगी, जो हनुमान चौराहे से सुबह और शाम निर्धारित समय पर संचालित होगी।

Updated on:
26 Mar 2026 08:32 pm
Published on:
26 Mar 2026 08:32 pm