
कैराकल को रेडियो कॉलर लगा कर जंगल में छोड़ा (फोटो-पत्रिका)
Caracal Wildlife Found in Jaisalmer: जैसलमेर: सीमावर्ती जैसलमेर में पाए जाने वाले कई दुर्लभ वन्यजीवों की फेहरिस्त में कैराकल (जंगली बिल्ली) भी शामिल है। पूरे देश में सिर्फ 50 कैराकल की मौजूदगी मानी जाती है।
ऐसे में जैसलमेर में कैराकल के बारे में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने अध्ययन शुरू किया है। जिले के घोटारू में कैराकल पर लगे रेडियो कॉलर के कैमरे में उसका परिवार कैद हुआ है।
जानकारी के अनुसार, वन विभाग ने एक सप्ताह पहले कैराकल पर रेडियो कॉलर और मोशन सेंसिंग कैमरा लगाया था। इसके बाद विभाग के पास अब जैसलमेर में आधिकारिक तौर पर 3 कैराकल होने की पुष्टि हुई है।
गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका ने गत 15 मार्च को घोटारू क्षेत्र में 'दुर्लभ कैराकल का शव मिला, वन्यजीव सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल' शीर्षक से खबर प्रकाशित कर विभाग का ध्यान आकृष्ट किया था।
इसके बाद हरकत में आए वन विभाग ने कैराकल के शिकार के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। वन विभाग की ओर से ग्रामीणों से भी समझाइश की जा रही है कि कैराकल दुर्लभ वन्यजीव है और इसे मारना संगीन अपराध है।
अध्ययन के तहत एक कैराकल पर रेडियो कॉलर और मोशन सेंसर कैमरा भी लगा था। जंगल में वह कैराकल साथियों के पास गई और 2 और कैराकल कैद हुई। टीम इन सेंसिंग कैमरा ट्रैप के जरिए कुनबे पर नजर रख रही है। वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की टीम रेगिस्तान में कैराकल के व्यवहार, उनके शिकार के पैटर्न और गतिविधियों का अध्ययन कर रही है।
कैराकल एक मध्यम आकार की जंगली बिल्ली है, जो अपनी चपलता और विशिष्ट शारीरिक बनावट के लिए जानी जाती है। यह मुख्य रूप से अफ्रीका, मध्य पूर्व, मध्य एशिया और भारत के कुछ हिस्सों (विशेषकर राजस्थान और गुजरात) में पाई जाती है।
इसका शरीर सुगठित होता है और इसके पैरों की लंबाई शरीर के अनुपात में अधिक होती है। इसके कान लंबे होते हैं, जिनके सिरों पर काले बालों के गुच्छे होते हैं, जो इसे अन्य बिल्लियों से अलग पहचान देते हैं।
कैराकल अपनी शिकार करने की शैली के लिए प्रसिद्ध है। यह हवा में 10 से 12 फीट ऊपर तक छलांग लगाकर उड़ते हुए पक्षियों को पकड़ने में माहिर होता है। इसी कारण इसे 'लेपर्ड ऑफ द स्काई' भी कहा जाता है। यह एक एकांतप्रिय और निशाचर (रात में सक्रिय रहने वाला) जीव है। यह छोटे स्तनधारियों, पक्षियों और कृन्तकों का शिकार करता है।
भारत में कैराकल की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। आवास की कमी और शिकार के कारण इनकी संख्या बहुत कम रह गई है। भारत सरकार ने इसे 'गंभीर रूप से लुप्तप्राय' प्रजातियों की सूची में रखा है। प्राचीन काल में, भारत में इनका उपयोग शिकार के लिए पालतू जानवर के रूप में भी किया जाता था।
Published on:
26 Mar 2026 12:08 pm
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