
जैसलमेर. स्वर्णनगरी में आम रास्तों से लेकर प्रमुख स्थलों तक स्वच्छंद विचरण करते पशु शहर की व्यवस्था के लिए चुनौती बने हुए हैं। बाजारों, सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर पशुओं की मौजूदगी आम बात हो गई है। ऐसे में राहगीरों और वाहन चालकों के साथ पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है, वहीं दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है। पर्यटन नगरी होने के कारण इन हालात का असर शहर की छवि पर भी पड़ता है। समस्या लंबे समय से जारी है। नगरपरिषद की ओर से पशुओं की धरपकड़ के लिए कार्रवाई किए जाने के बावजूद हालात में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आ रहा। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कार्रवाई के बाद भी सड़कों पर पशुओं का जमावड़ा क्यों बना हुआ है?
नगरपरिषद की ओर से पशुओं को पकड़ने के लिए अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन केवल धरपकड़ तक सीमित कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। शहरवासियों का कहना है कि शहर के संवेदनशील और व्यस्त मार्गों पर नियमित निगरानी रखी जाए तथा पशुओं को खुले में छोड़ने वालों की जिम्मेदारी तय की जाए। पकड़े गए पशुओं के सुरक्षित रखरखाव और उनकी दोबारा सड़कों पर पहुंचने की स्थिति रोकने के लिए भी प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए। नगरपरिषद की जिम्मेदारी केवल अभियान चलाने तक सीमित नहीं है। शहर में पशु नियंत्रण की नियमित कार्ययोजना बनाना, पर्याप्त संसाधनों और कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना, शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करना तथा अभियान के परिणामों की समीक्षा करना भी परिषद के दायित्वों में शामिल है। यदि कार्रवाई के बावजूद वही स्थान बार-बार पशुओं से भर रहे हैं, तो इसकी वजह तलाशकर व्यवस्था में सुधार करना जरूरी है।
पशुओं की समस्या के समाधान में पशुपालकों और दुकानदारों का सहयोग महत्वपूर्ण है। जनसहयोग नहीं मिलने से धरपकड़ अभियान प्रभावित हो रहा है, लेकिन इसे समस्या बने रहने का एकमात्र कारण नहीं माना जा सकता। गृहणी सरोज आचार्य के अनुसार नगरपरिषद को अपनी कार्रवाई की नियमितता, प्रभावशीलता और परिणामों के प्रति जवाबदेह रहना होगा। पशुओं को खुले में छोड़ने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई, नागरिकों की शिकायतों के लिए प्रभावी व्यवस्था और प्रमुख मार्गों पर नियमित निगरानी जैसे कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। युवा व्यवसायी उमेश कुमार ने सुझाव दिया कि दुकानदारों और नागरिकों को भी पशुओं को सड़कों पर एकत्र होने से रोकने तथा नगरपरिषद को सूचना देने में सहयोग करना चाहिए। राजेन्द्र कुमार पुरोहित ने कहा कि परिषद को यह स्पष्ट करना होगा कि धरपकड़ अभियान के तहत कितने पशु पकड़े गए, समस्या वाले क्षेत्रों में कितनी बार कार्रवाई हुई और दोबारा पशुओं के सड़कों पर आने से रोकने के लिए क्या व्यवस्था की गई है।
जैसलमेर की ऐतिहासिक पहचान और पर्यटन महत्व के साथ आमजन की सुरक्षा को देखते हुए सड़कों को पशुओं के स्वच्छंद विचरण से मुक्त करना जरूरी है। इसके लिए जिला प्रशासन के निर्देशानुसार नगरपरिषद निरंतर कार्रवाई कर रही है। स्थानीय पशुपालकों का सकारात्मक सहयोग आवश्यक है। उन्हें अपने पशुओं को बाड़े में बांध कर रखना चाहिए अन्यथा आने वाले दिनों में और सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- पवन कुमार, आयुक्त, नगरपरिषद जैसलमेर