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jaisalmer: पर्यटन से चमकता जैसाण, छोटे कारोबारियों के कारोबार की धुरी बनी पर्यटकों की आमद

जैसलमेर में पर्यटन सीजन की चमक केवल बड़े होटलों और डेजर्ट कैंपों तक सीमित नहीं है, बल्कि चाय के ठेलों से लेकर हस्तशिल्प और कपड़ों की छोटी दुकानों तक फैली आजीविका का मुख्य आधार भी है। हालांकि, पर्यटकों की बढ़ती आमद से हर छोटे दुकानदार की जेब तक यह आर्थिक लाभ समान रूप से पहुंच रहा है या नहीं, यह स्थानीय बाजारों की वास्तविक बिक्री और ग्राहकों के आंकड़ों पर निर्भर करता है।
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जैसलमेर

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Deepak Vyas

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Updated: 26 Oct 2026, 9:03 PM IST

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पर्यटन सीजन में ग्राहकों की बढ़ती आवाजाही से दुकानदारों की बिक्री में दिख रहा बदलाव

जैसलमेर. स्वर्णनगरी की पर्यटन अर्थव्यवस्था को अक्सर होटल, रिसॉर्ट और डेजर्ट कैंप के कारोबार से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसकी असली हलचल शहर के उन छोटे प्रतिष्ठानों में भी दिखाई देती है, जिनकी रोजमर्रा की बिक्री पर्यटकों की आवाजाही के साथ बदलती है। चाय की दुकान, नाश्ते का ठेला, स्थानीय हस्तशिल्प, कपड़ों की दुकान, स्मृति चिह्न बेचने वाले प्रतिष्ठान और छोटे रेस्टोरेंट इस आर्थिक गतिविधि की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। पर्यटकों की आमद बढ़ने पर इन दुकानों तक पहुंचने वाले ग्राहकों की संख्या और खरीदारी का स्वरूप बदलता है। सीजन की रौनक के साथ कारोबार की यह निर्भरता भी सामने आती है।जैसलमेर आने वाला पर्यटक केवल होटल में ठहरने या दर्शनीय स्थल देखने तक सीमित नहीं रहता। यात्रा के दौरान चाय-नाश्ता, स्थानीय व्यंजन, पारंपरिक परिधान, हस्तशिल्प और यादगार वस्तुओं की खरीदारी भी उसके खर्च का हिस्सा बनती है। यही खर्च छोटे कारोबारियों तक पहुंचने वाला आर्थिक प्रवाह तैयार करता है।हालांकि, इस प्रवाह का लाभ सभी दुकानदारों को समान रूप से मिलता है या नहीं, इसका आकलन स्थानीय बाजारों की वास्तविक बिक्री, ग्राहकों की संख्या और कारोबार के प्रकार के आधार पर ही किया जा सकता है। पर्यटकों की संख्या बढ़ना और छोटे दुकानदारों की कमाई बढ़ना दो अलग-अलग स्थितियां हैं। इनके बीच की कड़ी समझना पर्यटन अर्थव्यवस्था की वास्तविक तस्वीर सामने लाने के लिए जरूरी है।

सीजन में रफ्तार, ऑफ सीजन में चुनौती

पर्यटन सीजन के दौरान बाजारों में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से छोटे प्रतिष्ठानों को अधिक ग्राहक मिलने के अवसर बनते हैं। इसके विपरीत, पर्यटकों की संख्या घटने पर उन्हीं दुकानों को स्थानीय ग्राहकों पर अधिक निर्भर रहना पड़ता है। जिन कारोबारों का बड़ा हिस्सा पर्यटकों की खरीदारी से जुड़ा है, उनके लिए यह अंतर विशेष महत्व रखता है।

छोटे कारोबार की अर्थव्यवस्था के चार पहलू

ग्राहकों की आवाजाही: पर्यटन स्थलों और प्रमुख बाजारों के आसपास दुकानों को मिलने वाले ग्राहकों की संख्या कारोबार की दिशा बताती है।

खरीदारी का स्वरूप: चाय-नाश्ते से लेकर हस्तशिल्प तक पर्यटकों की पसंद अलग-अलग व्यवसायों को प्रभावित करती है।

मौसमी निर्भरता: सीजन और ऑफ सीजन की बिक्री में अंतर छोटे कारोबार की स्थिरता को समझने का आधार है।

स्थानीय खर्च का महत्व: पर्यटन से होने वाली कमाई का कितना हिस्सा छोटे दुकानदारों तक पहुंचता है, यह महत्वपूर्ण आर्थिक पहलू है।

एक्सपर्ट व्यू : पर्यटन का लाभ व्यापक होना जरूरी

पर्यटन अर्थव्यवस्था का आकलन केवल पर्यटकों की संख्या, होटल की बुकिंग या बड़े प्रतिष्ठानों के कारोबार से नहीं किया जा सकता। छोटे दुकानदारों की बिक्री, स्थानीय उत्पादों की खरीद और पर्यटकों के खर्च का बाजार में वितरण भी महत्वपूर्ण संकेतक हैं। पर्यटन से जुड़े स्थानीय कारोबार का नियमित सर्वेक्षण होने पर यह समझा जा सकता है कि सीजन का लाभ किन व्यवसायों तक पहुंचता है और ऑफ सीजन में किन क्षेत्रों को अधिक परेशानी होती है।

- पुष्पेंद्र व्यास, पर्यटन व्यवसायी