-रोजगार के लिए शहर से गांवों में पहुंच रहे लोग-प्रवासी परिवारों को मिल रहा आर्थिक सम्बल
जैसलमेर. रोजगार की तलाश में गांव छोड़कर अन्य राज्यों के शहरों तक गए प्रवासी परिवारों को कोरोना के चलते फिर से अपनी मिट्टी में लौटना पड़ा है और जिन गांवों को वे कभी छोड़ गए थे, वहां अपनों के बीच रहते हुए वे मजदूरी हासिल कर पा रहे हैं। ऐसे परिवारों के साथ अन्य लोगों के लिए महानरेगा योजना रोजी-रोटी का बड़ा जरिया बन गई है। सीमावर्ती जैसलमेर जिले में इन दिनों हजारों परिवार इस रोजगार प्रदाता योजना से जुड़कर इज्जत की रोटी कमा पा रहे हैं। योजना के चलते मौजूदा दौर में शहर से ज्यादा खुशहाल और निश्चिंत गांव बने हुए हैं।
रोजगार व मजदूरी देने में जैसलमेर आगे
कोरोना महामारी ने शहरों से कई किस्म के रोजगारों को या तो पूरी तरह से खत्म कर दिया अथवा उनमें मिलने वाला मेहनताना कम हो गया। दूसरी तरफ जैसलमेर जिले में महानरेगा योजना से गांवों में रोजगार के अवसर बढ़े हैं और काम के बदले मिलने वाली मजदूरी भी राजस्थान राज्य के औसत से ज्यादा है। जैसलमेर में वर्तमान में महानरेगा के तहत 44 हजार 206 लोगों को रोजगार पर लगाया हुआ है। इनमें जैसलमेर पंचायत समिति में 18821, सम में 15519 और सांकड़ा में 9866 को रोजगार दिलाया जा रहा है। पिछले साल इसी अवधि में करीब 35 हजार जने रोजगार प्राप्त कर रहे थे। ये बढ़े हुए लोग अन्य राज्यों से बेकार या कोरोना से भयाक्रांत होकर लौटे प्रवासी परिवारों तथा शहर में रोजगार छिन जाने के बाद गांव पहुंचने वाले हैं। इसी योजना के तहत गत जून माह में अब तक के सबसे ज्यादा 65 हजार 256 जनों को रोजगार मुहैया करवाया गया। जैसलमेर जिले में 99.87 प्रतिशत मजूदरों को समय पर उनके किए काम का भुगतान हो रहा है। यह स्थिति राजस्थान के कई जिलों से बेहतर है। ऐसे ही जिले में महानरेगा के तहत श्रमिकों को औसतन 179 रुपए का प्रतिदिन भुगतान हो रहा है जबकि राज्य का औसत 164 रुपए ही है। जैसलमेर जिला परिषद के अधिशासी अभियंता फरसाराम गौड़ के अनुसार महानरेगा ने गांवों की अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा सम्बल प्रदान किया है।
प्रवासी परिवारों को रोजगार
अन्य राज्यों से गांवों में आए प्रवासी परिवारों को रोजगार देने में महानरेगा खासी मददगार साबित हुई। जानकारी के अनुसार गत 30 जून तक प्रवासी 673 परिवारों को जॉब कार्ड जारी किए गए। 2418 परिवारों को मांगने पर रोजगार मुहैया करवाया गया है। केंद्र व राज्य सरकार ने महानरेगा की उपयोगिता को समझते हुए इसके जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार व 220 रुपए की अधिकतम मजदूरी दिलाने पर जोर दिया है। मिट्टी खोदने के अलावा केंद्र सरकार स्थायी महत्व के कार्य इसके जरिए करवा रही है। प्रधानमंत्री का जोर इस पर होने से गांवों में मॉडल तालाब का निर्माण, स्कूलों के खेल मैदानों सहित श्मशान घाट और चारागाह विकास के कार्य प्राथमिकता से करवाए जा रहे हैं। जिले में चालू वित्तीय वर्ष में महानरेगा के तहत पंचायत समिति जैसलमेर में 126 कार्यों पर 17.78 करोड़, सम में 146 पर 21.88 करोड़, और सांकड़ा समिति में 141 कार्यों पर 21.13 करोड़, जल संसाधन विभाग के तीन कार्यों पर 29.53 लाख सहित कुल 61 करोड़ रुपए के कार्यों की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृतियां जारी की गई है।
फैक्ट फाइल -
-44 हजार से ज्यादा को रोजगार
-179 रुपए औसत मजदूरी का भुगतान
-61 करोड़ के कार्यों को चालू वर्ष में मंजूरी
लगातार नए कार्यों को मंजूरी
महानरेगा में जरूरतमंदों को मांग पर तत्काल रोजगार दिलाने का प्रयास किया जा रहा है और लगातार नए कार्यों को मंजूरी दी जा रही है। विकास अधिकारियों के जरिए और कार्यों के प्रस्ताव मंगवाये जा रहे हैं। जिले में महानरेगा के तहत स्थानीय ग्रामीणों के साथ प्रवासियों को भी रोजगार उपलब्ध करवाने के सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं।
-ओमप्रकाश, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद जैसलमेर