जैसलमेर

Jaisalmer: आज का सवाल – मानसून काल में होने वाली बरसातों को अमृत तुल्य माना जाता है। इस पानी को कैसे सहेजा जाए?

कई बार अच्छी बरसात होने के बावजूद उस पानी का सदुपयोग निश्चित नहीं हो पाता और वह किसी काम में नहीं आ पाता। इस पानी के वैज्ञानिक अंदाज में उपयोग को अब तक नजरअंदाज किया गया है। जबकि समय की मांग है कि अब इस कार्य में और देरी न की जाए।
2 min read
Jul 11, 2026
patrika (file photo)
patrika (file photo)

आज का सवाल - मानसून काल में होने वाली बरसातों को अमृत तुल्य माना जाता है। विशेषकर जैसलमेर जैसे मरुस्थलीय क्षेत्र में इसका महत्व अत्यधिक है। इस पानी को कैसे सहेजा जाए?

सीमांत मरुस्थलीय जैसलमेर जिला हमेशा से कम वर्षा वाला क्षेत्र माना जाता रहा है। देश के सबसे कम बरसात वाले क्षेत्र में इस जिले का शुमार होता है। ऐसे में मानसून काल में होने वाली बारिश अमृत के समान ही होती है। कई बार अच्छी बरसात होने के बावजूद उस पानी का सदुपयोग निश्चित नहीं हो पाता और वह किसी काम में नहीं आ पाता। इस पानी के वैज्ञानिक अंदाज में उपयोग को अब तक नजरअंदाज किया गया है। जबकि समय की मांग है कि अब इस कार्य में और देरी न की जाए।

अनिवार्य हो रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम

जैसलमेर में मानसून की हर बूंद अमृत के समान है। हमें घरों की छतों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य रूप से अपनाना चाहिए। यदि बरसाती पानी को भूमिगत टांकों और कुओं में संग्रहित किया जाए तो पूरे साल पेयजल संकट काफी हद तक कम हो सकता है।

- आनन्दसिंह देवड़ा

खेत की सबसे बड़ी पूंजी

बरसाती पानी खेत की सबसे बड़ी पूंजी है। खेतों में मेड़बंदी, खडीन, तालाब और एनीकट बनाकर वर्षा जल को रोका जाए। इससे जमीन में नमी बढ़ेगी, भूजल रिचार्ज होगा और फसलों के साथ पशुधन को भी लाभ मिलेगा।

- उम्मेद कुमार बल्लाणी

जल संग्रहण प्रणाली सुधरे

शहरों में अधिकांश बरसाती पानी नालों के जरिए व्यर्थ बह जाता है। प्रत्येक सरकारी भवन, स्कूल, कार्यालय और आवासीय कॉलोनी में वर्षा जल संग्रहण प्रणाली प्रभावी ढंग से लागू की जाए। इससे भूजल स्तर सुधरेगा और भविष्य की जल समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा।

- युधिष्टर

हर नागरिक निभाए जिम्मेदारी

जल संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का दायित्व है। यदि हर परिवार बरसात के पानी को सहेजने का संकल्प ले और पारंपरिक टांके, नाड़ी, बेरी व तालाबों के संरक्षण में भागीदारी निभाए, तो जैसलमेर में पानी की किल्लत को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

- गजेन्द्र पंवार

अगले सप्ताह का सवाल

जैसलमेर जिले में अनेक सरकारी विद्यालयों में पद रिक्तता की समस्या अब तक बनी हुई है। इससे विद्यार्थियों के अध्यययन में बड़ी बाधा पहुंच रही है। यह एक बड़ी वजह निजी विद्यालयों के पनपने की भी है। इस विषय में आप क्या सोचते हैं, इस पर अपनी फोटो मय प्रतिक्रिया निम्न नबर पर भिजवाएं। 9462246222

Updated on:
11 Jul 2026 09:11 pm
Published on:
11 Jul 2026 09:11 pm