
देश की सुरक्षा और सैन्य ताकतों के आधुनिकीकरण को लेकर राजस्थान के जैसलमेर में एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसका मुख्य विषय ‘भारतीय सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण’ था। बैठक में भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों, युद्ध के बदलते तौर-तरीकों, तकनीकी प्रगति और भारतीय सेनाओं को 'फ्यूचर-रेडी' (भविष्य के लिए तैयार) व तकनीक संपन्न बनाने के विजन पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बैठक को संबोधित करते हुए भारत की रक्षा उत्पादन और निर्यात में आई ऐतिहासिक वृद्धि का ब्यौरा दिया:
रक्षा उत्पादन : वित्त वर्ष 2014-15 में जो रक्षा उत्पादन ₹46,429 करोड़ था, वह वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2029 तक ₹3 लाख करोड़ का वार्षिक रक्षा उत्पादन हासिल करना है।
रक्षा निर्यात : वर्ष 2014 में जो रक्षा निर्यात ₹2,000 करोड़ से भी कम था, वह अब बढ़कर लगभग ₹40,000 करोड़ हो गया है। इसे 2029 तक ₹50,000 करोड़ पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
रिकॉर्ड रक्षा बजट : रक्षा मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा बजट बढ़ाकर रिकॉर्ड ₹7.85 लाख करोड़ किया गया है, जिसमें आधुनिकीकरण और पूंजीगत खरीद के लिए ₹2.19 लाख करोड़ का पूंजीगत परिव्यय शामिल है।
जैसलमेर में हुई इस बैठक में सेनाओं के आधुनिकीकरण के लिए छह मुख्य स्तंभों पर सहमति बनी:
क्षमता विकास व आधुनिकीकरण: युद्ध क्षमता बढ़ाने के लिए अगली पीढ़ी के प्लेटफॉर्म्स, हथियार प्रणालियों और अत्याधुनिक तकनीकों को तेजी से शामिल करना।
त्रि-सेवा एकीकरण: थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच संयुक्त परिचालन योजना और तालमेल को मजबूत करना।
स्वदेशी रक्षा निर्माण : अनुसंधान, डिजाइन और निर्माण में घरेलू उद्योगों, स्टार्टअप्स और अकादमिक संस्थानों की भागीदारी बढ़ाकर 'आत्मनिर्भर भारत' को गति देना।
उभरती हुई प्रौद्योगिकियां: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्वायत्त प्रणालियों, अनमैन्ड प्लेटफॉर्म्स, साइबर, स्पेस, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और उन्नत संचार प्रणालियों का इस्तेमाल।
अनुसंधान व नवाचार (R&D): डीआरडीओ (DRDO), सेनाओं, सार्वजनिक उपक्रमों (DPSUs) और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को मजबूत करना।
संसाधन अनुकूलन: आधुनिकीकरण पहलों को परिणाम तक पहुंचाने के लिए स्पष्ट प्राथमिकताएं और मील के पत्थर तय करना।
'मानव पूंजी और सेना के नए फॉर्मेशन': असानी, भैरव और शक्तिबाण प्लूटून
रक्षा मंत्री ने कहा कि सेना की ताकत केवल तकनीक या वित्तीय संसाधनों से तय नहीं होती, बल्कि जवानों की तैयारी और क्षमता सबसे अहम है।
"युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए तीनों सेनाओं ने अपनी संरचनाओं में निरंतर सुधार किया है। भारतीय सेना के नए फॉर्मेशन जैसे 'असानी' (Asani), 'भैरव' (Bhairav) और 'शक्तिबाण' (Shaktiban) प्लूटून आधुनिक युद्धभूमि की जरूरतों के अनुसार खुद को ढालने और समकालीन परिचालन आवश्यकताओं से निपटने में बेहद प्रभावी साबित हो रहे हैं।"— राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री
इस परामर्शदात्री बैठक में लोकसभा और राज्यसभा के कई सांसदों ने भाग लिया और अपने बहुमूल्य सुझाव दिए। बैठक में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, सचिव (रक्षा उत्पादन) संजीव कुमार, सचिव (पूर्व सैनिक कल्याण) सुकृति लिखी, सचिव (रक्षा वित्त) विश्वजीत सहाय सहित सेनाओं और रक्षा मंत्रालय के कई शीर्ष असैनिक व सैन्य अधिकारी उपस्थित रहे।