
जैसलमेर. पश्चिमी सरहद पर बसे जैसलमेर जिले के ग्रामीण इलाकों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और स्थायी विकास कार्यों को गति देने में राज्यसभा सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीएलएडीएस) महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरी है। राज्यसभा सांसदों का कोई निश्चित संसदीय क्षेत्र नहीं होने के बावजूद उन्हें अपने निर्वाचित राज्य के किसी भी जिले में विकास कार्यों की अनुशंसा करने का अधिकार प्राप्त है। इसी व्यवस्था का लाभ जैसलमेर को लगातार मिल रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी, भाजपा के मदन राठौड़, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मुकुल वासनिक, रणदीपसिंह सुरजेवाला, केसी वेणुगोपाल, प्रमोद तिवारी, नीरज डांगी सहित अनेक वर्तमान एवं पूर्व राज्यसभा सांसदों ने सांसद निधि से जैसलमेर जिले में विकास कार्यों के लिए करोड़ों रुपए की राशि अनुशंसित की है। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह तथा महेश जेठमलानी और डॉ. सोनल मानसिंह की अनुशंसाओं से भी जिले में विभिन्न विकास कार्य स्वीकृत हुए। अधिकांश कार्यों की लागत पांच लाख से 25 लाख रुपए के बीच रही।
सांसद निधि से जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रेवल सड़कें, पेयजल टांके, विद्यालयों में अतिरिक्त कक्ष, वाचनालय, सामुदायिक भवन, सार्वजनिक शौचालय, पुस्तकालय, प्रतीक्षालय तथा अन्य स्थायी सार्वजनिक परिसंपत्तियों का निर्माण कराया गया। इन कार्यों से दूरस्थ गांवों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार हुआ और ग्रामीणों को प्रत्यक्ष लाभ मिला।
एमपीएलएडीएस योजना के तहत प्रत्येक सांसद को प्रतिवर्ष पांच करोड़ रुपए की निधि उपलब्ध कराई जाती है। यह राशि दो किश्तों में जारी होती है तथा अप्रयुक्त राशि आगामी वर्षों में भी उपयोग की जा सकती है। योजना का उद्देश्य स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप टिकाऊ सार्वजनिक परिसंपत्तियों का निर्माण कर क्षेत्रीय विकास को गति देना है।
राज्यसभा सांसद अपने निर्वाचित राज्य के किसी भी जिले में विकास कार्यों की अनुशंसा कर सकेंगे। इसी प्रावधान के कारण राजस्थान के सीमांत जिले जैसलमेर को भी विभिन्न राज्यों और राजनीतिक दलों से जुड़े राज्यसभा सांसदों की अनुशंसाओं का लाभ मिलता रहा है। अनुशंसित कार्यों के क्रियान्वयन की प्रक्रिया जिला प्रशासन एवं जिला परिषद संबंधित विभागों के माध्यम से तकनीकी स्वीकृति, निविदा और निर्माण कार्य पूर्ण कराते हैं। योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार निधि का उपयोग केवल स्थायी सार्वजनिक परिसंपत्तियों के निर्माण में किया जा सकता है। अनुसूचित जाति बहुल क्षेत्रों में न्यूनतम 15 प्रतिशत तथा अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्रों में 7.5 प्रतिशत राशि व्यय करना अनिवार्य है। राष्ट्रीय एकता को प्रोत्साहन देने तथा प्राकृतिक आपदा जैसी विशेष परिस्थितियों में भी निर्धारित सीमा तक राशि अनुशंसित की जा सकती है। सीमावर्ती जिले की विशाल भौगोलिक सीमा और दूरस्थ ग्रामीण बसावट को देखते हुए सांसद निधि से होने वाले विकास कार्य स्थानीय आवश्यकताओं की पूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
विभिन्न राजनीतिक दलों के राज्यसभा सांसदों ने क्षेत्रीय भेदभाव से ऊपर उठकर जैसलमेर के विकास कार्यों के लिए राशि अनुशंसित की है। इससे सीमांत गांवों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार हुआ है। यदि भविष्य में भी जनप्रतिनिधियों की ऐसी सक्रियता बनी रही तो जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में विकास की गति और तेज होगी।
— अब्दुल्ला फकीर, पूर्व जिला प्रमुख, जैसलमेर