भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात और अपने घर-परिवारों से सैकड़ों-हजारों किलोमीटर दूर रेगिस्तानी इलाके में कर्तव्य निभा रहे सीमा सुरक्षा बल के जवानों की सूनी कलाइयों पर भी शनिवार को रक्षासूत्र बांधे जाएंगे।
भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात और अपने घर-परिवारों से सैकड़ों-हजारों किलोमीटर दूर रेगिस्तानी इलाके में कर्तव्य निभा रहे सीमा सुरक्षा बल के जवानों की सूनी कलाइयों पर भी शनिवार को रक्षासूत्र बांधे जाएंगे। सीमा जन कल्याण समिति के कार्यकर्ता और उनके साथ जाने वाली बालिकाएं इन जवानों के रक्षासूत्र बांध कर जवानों की सुरक्षा और दीर्घायु की कामना करेंगी। पर्व के दिन घरों से दूर सीमा सुरक्षा बल के जवान भी उनका इंतजार करते हैं। इस बार भी रक्षाबंधन पर्व पर राजस्थान के पश्चिमी इलाके में 1080 किलोमीटर लम्बी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सीमा सुरक्षा बल की 296 सीमा चौकियों और सेक्टर व बटालियन मुख्यालयों पर करीब 8000 जवानों व अधिकारियों को रक्षासूत्र बांधने करीब 100 टीमों में कार्यकर्ता पहुंचेंगे। इसी तरह से एकदम सीमा से सटे 203 प्रथम गांवों से भी नागरिक इस मुहिम में सक्रिय भागीदारी करेंगे। दुर्गम रेतीले इलाकों में बनी सीमा चौकियों पर जाने वाली टोलियों में बेटियां भी होंगी। गौरतलब है कि सीमाजन कल्याण समिति की ओर से विगत दो दशकों से अधिक समय से सरहद पर जाकर सुरक्षा प्रहरियों के साथ रक्षाबंधन पर्व मनाया जाता है। इस बार भी जैसलमेर के साथ बाड़मेर, बीकानेर, श्रीगंगानगर जिलों से विभिन्न टोलियां रक्षासूत्र बांधने जाएंगी। यही नहीं बालिकाएं व कार्यकर्ता स्कूूलों में देश की सुरक्षा के लिए तैनात जवानों के लिए स्कूली छात्राओं की ओर से लिखे पत्र भी ले जाएंगे।
गौरव के क्षणों की अनुभूति करने और सीमा सुरक्षा बल के जवानों का मनोबल बढ़ाने व पर्व की खुशियों में भागीदार बनने के लिए पहुंचने वाली टोलियों के लिए मार्ग इतना सहज भी नहीं है। जिला मुख्यालय से 225 से 250 किलोमीटर की दूरी पर कुछ सीमा चौकियां ऐसी भी होती हैं, जहां दूर.दूर तक केवल रेगिस्तान ही नजर आता है। प्रदेश में बल की 296 सीमा चौकियां हैं। इनमें 122 सीमा चौकियां अकेले जैसलमेर जिले में स्थापित हैं।
रक्षाबंधन का पवित्र त्योहार जहां हर कोई अपने परिवार के साथ मनाना पसंद करता है, वहीं सीमाजन के कार्यकर्ता विगत वर्षों से इस शुभ अवसर पर देश की सुरक्षा में तैनात जवानों के साथ उत्साहपूर्वक पहुंचते हैं। सीमाजन के प्रदेश सह प्रचार प्रमुख शरद व्यास ने बताया कि रेत के समंदर में आई सीमा चौकियों तक पहुंचकर जवानों को रक्षासूत्र बांधने की परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है। जिला मंत्री भूरसिंह बीदा के अनुसार जिला और तहसील केन्द्रों से जाने वाली रक्षाबंधन टोलियां अपने साथ स्कूलों, कॉलेजों में अध्ययनरत छात्राओं की ओर से जवानों के नाम हस्तलिखित रक्षा बंधन पत्रक और राखियां भी साथ ले जाती हैं।
रक्षाबंधन पर सीमाजन कल्याण समिति के कार्यकर्ता और संबंधित सीमावर्ती क्षेत्रों के ग्रामीण रक्षासूत्र बांधेंगे। सीमाजन के कार्यकर्ता और जिलों के सीमावर्ती गांवों के लोग, जिनमें बालिकाएं भी शामिल हैं, रक्षाबंधन पर्व पर अलग-अलग सीमा क्षेत्रों में पहुंचेंगे। महिला सुरक्षा प्रहरी भी रक्षा सूत्र बांधकर रक्षाबंधन पर्व मनाती हैं।