रेल यात्रियों की सुविधा के दावों के बीच रामदेवरा रेलवे स्टेशन की स्थिति गंभीर बनी हुई है। प्लेटफार्म संख्या 1 और 2 पर टीन शेड पर्याप्त नहीं होने से यात्रियों को भीषण गर्मी और बारिश में खुले में ट्रेन का इंतजार करना पड़ता है।
रेल यात्रियों की सुविधा के दावों के बीच रामदेवरा रेलवे स्टेशन की स्थिति गंभीर बनी हुई है। प्लेटफार्म संख्या 1 और 2 पर टीन शेड पर्याप्त नहीं होने से यात्रियों को भीषण गर्मी और बारिश में खुले में ट्रेन का इंतजार करना पड़ता है। छाया के अभाव में यात्री धूप में झुलसते हैं और बारिश में भीगते रहते हैं।
देशभर से लाखों श्रद्धालु बाबा रामदेव समाधि के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं, लेकिन सुविधाओं का विस्तार नहीं हो पाया। बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से यात्री पेड़ों के नीचे या शौचालयों की ओट में समय बिताने को मजबूर हैं। सोमवार सुबह प्लेटफार्म संख्या 1 पर डेमो ट्रेन का इंतजार कर रहे यात्रियों को उमस भरी गर्मी में खड़ा रहना पड़ा। पिछले वर्षों में ट्रेनों की संख्या और यात्री भार बढ़ा, लेकिन प्लेटफार्मों पर टीन शेड विस्तार नहीं हुआ। जैसलमेर जाने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों का बड़ा हिस्सा यहीं उतरता है।
- 60 लाख के करीब यात्रियों का साल भर में आगमन
- 2 प्लेटफार्म मौजूद है रामदेवरा रेलवे स्टेशन पर
- 24 घंटे में 12 ट्रेनों का हो रहा आवागमन
टीन शेड छोटा होने के कारण अधिकांश समय खुले में खड़ा रहना पड़ता है। तेज धूप में शरीर झुलसने लगता है और राहत के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। कई बार बुजुर्गों और महिलाओं को बैठने की जगह भी नहीं मिलती। ट्रेन के इंतजार में समय लंबा लगने लगता है और थकान बढ़ती जाती है। यदि शेड बड़ा हो जाए तो यात्रियों को काफी राहत मिल सकती है।
— रमेश कुमार, बाड़मेर
बारिश के दिनों में प्लेटफार्म पर स्थिति और खराब हो जाती है। टीन शेड छोटा होने से सभी लोग उसके नीचे नहीं आ पाते और खुले में खड़े रहना पड़ता है। ट्रेन आने तक कपड़े पूरी तरह भीग जाते हैं। सामान भी खराब हो जाता है। बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। कई बार मजबूरी में भीगते हुए ही ट्रेन पकड़नी पड़ती है।
— सुनीता देवी, जोधपुर
परिवार के साथ यात्रा के दौरान सबसे अधिक परेशानी होती है। छोटे बच्चों को धूप और गर्मी में संभालना मुश्किल हो जाता है। बैठने की जगह नहीं मिलने पर उन्हें गोद में लेकर खड़ा रहना पड़ता है। पानी और छाया की कमी से बच्चे चिड़चिड़े हो जाते हैं। लंबे इंतजार के दौरान परेशानी बढ़ती जाती है और यात्रा का अनुभव खराब हो जाता है।
— महावीर सिंह, नागौर