धार्मिक नगरी रामदेवरा में इन दिनों बारिश के चलते जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
धार्मिक नगरी रामदेवरा में इन दिनों बारिश के चलते जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि बरसाती पानी की निकासी के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं होने से सड़कों पर भारी मात्रा में पानी जमा हो जाता है। ऐसी स्थिति में श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर भी संकट खड़ा हो गया है। मानसून के बीच आगामी दिनों में लोकदेवता बाबा रामदेव का वार्षिक मेला लगने जा रहा है, जिसमें लाखों श्रद्धालु देश भर से रामदेवरा पहुंचते हैं। ऐसे में जल निकासी की अनदेखी उनकी आस्था और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ जैसी प्रतीत हो रही है।
रामदेवरा की प्रमुख सड़कों पर 5 से 10 मिनट की बारिश में ही इतना पानी जमा हो जाता है कि वह तालाब जैसा दृश्य पेश करती हैं। स्थानीय लोगों व दर्शनार्थियों को सड़क पार करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। रेलवे स्टेशन से जुड़ी लिंक सड़क, डाली बाई धर्मशाला के पास, अस्पताल के बाहर, नोखा चौराहा, पशु अस्पताल, पीएम श्री राजकीय विद्यालय के सामने जैसी जगहों पर हर बारिश में पानी भराव की स्थिति बन जाती है।
रूणिचा कुएं तक जाने के लिए श्रद्धालुओं को रेलवे ट्रैक के नीचे बने अंडरपास 85 से होकर गुजरना होता है, लेकिन बारिश में यह अंडरपास पूरी तरह जलमग्न हो जाता है। ऐसे में श्रद्धालु जान जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक के ऊपर से गुजरते हैं, जिससे किसी भी वक्त हादसा हो सकता है। इसके बावजूद अब तक कोई समाधान नहीं किया गया।स्थायी समाधान की दरकार
रामदेवरा की स्थिति हर साल मानसून में एक जैसी बनी रहती है। पानी सड़कों को क्षतिग्रस्त करता है, पैदल यात्रियों का आवागमन बाधित करता है और क्षेत्र में कीचड़ व दुर्गंध की समस्या बढ़ जाती है। प्रशासनिक तंत्र की उदासीनता के चलते जल निकासी का कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया है।