
जैसलमेर @ पत्रिका. राजस्थान वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञों ने मिलकर एक मादा कैराकाल को रेडियो-कॉलर लगाकर सफलतापूर्वक उसके प्राकृतिक अवास में छोड़ा है। यह कैराकाल 1 सितंबर को स्थानीय ग्रामीणों को कमजोर अवस्था में मिली थी, जिसके बाद वन विभाग को सूचना दी गई। वन विभाग की टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर कैराकाल को सुरक्षित रेस्क्यू किया और उसे आवश्यक देखभाल व उपचार दिया। रेस्क्यू के बाद उसकी स्थिति पर 24 घंटे निगरानी रखी गई।
लगातार निगरानी और उपचार से जब कैराकाल पूरी तरह स्वस्थ हो गई और प्राकृतिक परिस्थितियों में रहने में सक्षम पाई गई, तब उसे रेडियो-कॉलर लगाकर उसके प्राकृतिक अवास में छोड़ने का निर्णय किया गया। कैराकाल भारतीय मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र में पाई जाने वाली एक अत्यंत दुर्लभ और महत्त्वपूर्ण छोटी बिल्ली प्रजाति है। जैसलमेर का मरुस्थलीय परिदृश्य इस प्रजाति के संरक्षण के लिए विशेष महत्त्व रखता है। यह जैसलमेर में वन विभाग की ओर से कैराकाल को रेडियो-कॉलर लगाकर प्राकृतिक अवास में छोड़े जाने का दूसरा अवसर है। इससे पहले 25 जनवरी को भी एक नर कैराकाल को इसी तरह छोड़ा गया था। रिलीज़ के बाद इस कैराकाल की गहन वैज्ञानिक निगरानी की जाएगी। इसके लिए क्षेत्र में कैमरा ट्रैप लगाए जाएंगे और रेडियो-कॉलर से प्राप्त लोकेशन के साथ कैमरा ट्रैप डाटा का विश्लेषण किया जाएगा। इस अध्ययन से कैराकाल के पारिस्थितिक व्यवहार, अवास उपयोग, भोजन की आदतों और गतिविधि पैटर्न को समझने में सहायता मिलेगी, जिससे भविष्य की संरक्षण रणनीतियां तैयार की जा सकेंगी। वन विभाग ने वन्यजीव संरक्षण में स्थानीय समुदाय की भागीदारी और आधुनिक तकनीक के उपयोग की प्रतिबद्धता दोहराई है।
लाठी . राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या- 11 पर लाठी क्षेत्र में मृत गोवंश को सड़क किनारे डालने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के कार्मिकों पर मृत गोवंश के निस्तारण में लापरवाही का आरोप किया है। वन्यजीव प्रेमी मांगीलाल विश्नोई ने बताया कि धोलिया, खेतोलाई और गंगाराम की ढाणी क्षेत्र से गुजरने वाले राजमार्ग के किनारे कई स्थानों पर मृत गोवंश पड़े हैं। मृत पशुओं से फैल रही दुर्गंध के कारण आसपास के क्षेत्र के लोगों को परेशानी हो रही है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में बाबा रामदेव का मेला चल रहा है, जिससे राजमार्ग से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आवागमन कर रहे हैं। सड़क किनारे पड़े मृत गोवंश से उठने वाली दुर्गंध श्रद्धालुओं के लिए भी कष्टप्रद है। विश्नोई ने आशंका जताई कि मृत गोवंश लंबे समय तक सड़क किनारे पड़े रहने से आवारा पशु आसपास मंडराते रहते हैं, जिससे उनके दुबारा सड़क पर आने और तेज रफ्तार वाहनों से हादसे का खतरा बढ़ सकता है।