जैसलमेर

jaisalmer: जिला प्रमुख पद के आरक्षण से बदले समीकरण, दावेदारों के चेहरे अभी पर्दे में

शहरी सरकारों के चुनाव के बाद अब गांवों की सरकार के चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। जिला प्रमुख पद एसटी के लिए आरक्षित होने से संभावित दावेदारों और राजनीतिक समीकरणों में बदलाव आया है। भाजपा-कांग्रेस में नए चेहरों पर मंथन शुरू हो गया है, लेकिन अभी किसी नाम पर सहमति नहीं बनी है।
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Oct 02, 2026
jaisalmer news election
जैसलमेर स्थित जिला परिषद कार्यालय।

जैसलमेर. शहरी सरकारों के चुनाव पूरे होने के बाद अब नजरें गांवों की सरकार यानी जिला परिषद के चुनाव और जिला प्रमुख के पद पर टिक गई हैं। जैसलमेर नगर परिषद में भाजपा और पोकरण में कांग्रेस की जीत के बाद पंचायतीराज चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। जिला प्रमुख पद अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित होने से संभावित दावेदारों और राजनीतिक समीकरणों में बदलाव आया है। अब तक जिन नामों की चर्चा चल रही थी, उनके स्थान पर नए चेहरों पर विचार शुरू हो गया है। दोनों प्रमुख दलों में संभावित दावेदारों को लेकर अंदरखाने मंथन जारी है, लेकिन अभी किसी एक नाम पर सहमति सामने नहीं आई है।

एक ही वार्ड एसटी के लिए आरक्षित

जिला परिषद के 21 वार्डों की आरक्षण लॉटरी में निर्वाचन क्षेत्र संख्या 9 अमरसागर को अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। इस वार्ड में अमरसागर, बड़ाबाग, सता, मूलसागर, धऊवा, भू, दरबारी का गांव, डाबला, काठोड़ी, देवा, बरमसर, भागू का गांव और थईयात ग्राम पंचायतें शामिल हैं। जिला प्रमुख पद एसटी के लिए आरक्षित होने के बावजूद संभावित दावेदारों की तलाश केवल वार्ड 9 तक सीमित रहने के आसार नहीं हैं। जिला परिषद के वार्ड 4, 6, 13, 14, 17 और 18 अनारक्षित हैं, जबकि वार्ड 7, 10, 11, 15, 16, 19 और 21 महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। ऐसे में राजनीतिक दल अनारक्षित वार्डों में भी एसटी वर्ग के संभावित प्रत्याशियों को मैदान में उतारने पर विचार कर सकते हैं। इससे जिला प्रमुख पद के लिए संभावित चेहरों का दायरा बढ़ गया है।

आरक्षण के बाद बदली रणनीति

जिला प्रमुख पद के आरक्षण से पहले कुछ नामों को लेकर स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा थी। एसटी आरक्षण सामने आने के बाद इन चर्चाओं पर विराम लगा है और राजनीतिक दलों को रणनीति नए सिरे से तैयार करनी पड़ रही है। अब जातीय समीकरण के साथ क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, संगठन में पकड़ और निर्वाचित सदस्यों के बीच स्वीकार्यता जैसे पहलुओं पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।भाजपा और कांग्रेस के स्थानीय नेताओं के स्तर पर संभावित चेहरों को लेकर बातचीत शुरू हो गई है। बैठकों और व्यक्तिगत मुलाकातों के साथ वरिष्ठ नेताओं तक संभावित नाम पहुंचाए जा रहे हैं। हालांकि, दोनों दलों की ओर से अभी किसी नाम को अधिकृत रूप से आगे नहीं किया गया है।

वार्ड 9 के साथ अन्य क्षेत्रों पर भी नजर

वार्ड 9 एसटी के लिए आरक्षित होने से इस क्षेत्र के संभावित दावेदारों की चर्चा स्वाभाविक रूप से बढ़ी है। वहीं अनारक्षित वार्डों से एसटी वर्ग के प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारने की संभावना ने राजनीतिक दलों के सामने विकल्प बढ़ा दिए हैं। ऐसे में जिला प्रमुख पद की दावेदारी का दायरा केवल आरक्षित वार्ड तक सीमित नहीं माना जा रहा। दोनों प्रमुख दल संभावित चेहरों के राजनीतिक आधार और निर्वाचित सदस्यों के समीकरणों को देखते हुए विकल्प तलाश रहे हैं। फिलहाल किसी नाम पर अंतिम सहमति नहीं बनी है। अब पंचायतीराज चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ जिला प्रमुख पद के संभावित चेहरे भी स्पष्ट होंगे।

Updated on:
02 Oct 2026 08:19 pm
Published on:
02 Oct 2026 08:19 pm