लौटने लगे मेहमान...सीजन ‘ऑफ’ होते ही छिनने लगा रोजगार
पर्यटन सीजन की विदाई से हजारों लोग घर पकडऩे को मजबूर, सम सेंडड्यून्स हुए वीरान, पसरने लगा सन्नाटा
जैसलमेर. पर्यटन नगरी जैसलमेर में गर्मी के चेतन होने के साथ ही पर्यटन सीजन विधिवत रूप से ‘ऑफ’ हो चुका है। इसके साथ ही विभिन्न पर्यटन संबंधी प्रतिष्ठानों में काम कर रहे हजारों कार्मिकों से उनका रोजगार छिनने लगा है।इनमें जैसलमेर शहर स्थित होटलों, रेस्टोरेंट्स, गाइडिंग, हैंडीक्राफ्ट, ट्रेवल एजेंसियों आदि से लेकर सम-खुहड़ी के रिसोट्र्स के कामगार व ऊंट चालक आदि शामिल हैं।इनमें युवाओं की तादाद सर्वाधिक है और छिपी हुई बेरोजगारी का दंश झेलते हुए अधिकांश जने कम से कम तीन महीनों तक घर बैठने के लिए विवश हैं।यह समस्या वीकेंड ट्यूरिज्म के जैसलमेर में प्रभावी होने के बावजूद कमोबेश जारी है।
गायब होने लगी रौनक
अप्रेल माह के आगे बढऩे के साथ वर्तमान में जिले के सभी पर्यटन स्थलों से सैलानियों की रौनक लगभग गायब हो चुकी है। सोनार दुर्ग , गड़ीसर सरोवर, पटवा हवेलियों आदि दर्शनीय स्थलों से लेकर सम और खुहड़ी के सेंडड्यून्स पर अब सन्नाटा पसरने लगा है।शहर में इन दिनों प्रतिदिन बमुश्किल 300-400 देशी-विदेशी सैलानी पहुंच रहे हैं।वीकेंड यानी शनिवार व रविवार को इनकी तादाद बढकऱ दो-तीन गुना हो जाती है। सीजन में रोजाना हजारों की आवक के आगे पर्यटकों की यह संख्या नगण्य ही मानी जाती है।
अधिकांश रिसोट्र्स पर लटके ताले
-सम सेंडड्यून्स पर करीब 70 रिसोट्र्स में से मौजूदा समय में बमुश्किल आधा दर्जन ही संचालित हो रहे हैं । शेष पर ताले जड़ दिए गए हैं तथा वे जुलाई-अगस्त माह से शुरू होंगे।
-जो रिसोट्र्स चल भी रहे हैं, उनमें चंद पक्के टैंट ही सैलानियों के ठहराव के लिए रखे गए हैं।
-सम क्षेत्र में गर्मी के मौसम में चलने वाले रेतीले तूफान से टैंट्स को व्यापक नुकसान की आशंका के चलते रिसोट्र्स संचालक उन्हें समेटने में ही भलाई समझते हैं।
-जिन रिसोट्र्स में सीजन के दिनों में 35-40 का स्टाफ कार्यरत होता है, उनकी संख्या अब घटकर 5-7 पर आ गई है।
-सम में एक हजार से ज्यादा ऊंट चालकों के लिए इन दिनों पालतु रेगिस्तान के जहाजों का भरण पोषण करना भी कठिन है।
शहर में भी हालात नहीं जुदा
जैसलमेर शहर में पर्यटन सीजन की विदाई के साथ मौसमी बेरोजगारी रंग दिखाने लगी है। पर्यटकों की आवक में कमी के साथ गाइडिंग करने वाले ज्यादातर युवा बेकार बैठने को मजबूर हैं। इनमें अधिकृत और अनाधिकृत दोनों प्रकार के गाइड शामिल हैं, जिनकी संख्या पांच सौ से बाहर है। ऐसे ही शहर की बड़ी होटलों को छोडकऱ शेष में स्टाफ की छंटनी का दौर चल रहा है। ट्रेवल एजेंट्स, टैक्सी वाहनों के मालिकों, पर्यटन पर आधारित प्रतिष्ठान चलाने वाले लोगों से लेकर अन्य दुकानदारों के रोजगार पर भी सीधी चोट हुई है।
पर्यटन क्षेत्र की विकट समस्या
पर्यटन सीजन के ऑफ होने के चलते इस व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए रोजगार का संकट विद्यमान हो जाता है। यह इस क्षेत्र की सबसे विकट समस्या है। कई जनों के सामने तो घर चलाना मुश्किल हो जाता है। गर्मियों में सैलानियों को आकर्षित करने के प्रयास किए जाने चाहिए।
-कैलाश कुमार व्यास, पर्यटन व्यवसायी