
- जातिवाद और अहंकार छोड़ धर्म रक्षा के लिए करें हिन्दू समाज को जाग्रत रहकर संगठित रखने की परिकल्पना
- जाग्रत हिंदू महासंगम: शक्ति नगरी पोकरण में हुआ ऐतिहासिक संघ का पथ संचलन
- जयनारायण व्यास सर्किल पर हुआ अद्भुत संगम, शहरवासियों ने किया पुष्पवर्षा से स्वागत
पोकरण. अपने समाज की जातियां यह एक व्यवस्था है परंतु जातिवाद का अहंकार यह उचित नहीं। सब जातियां इस विराट हिंदू समाज के ही अंग है। कोई अंग कमजोर होने पर संपूर्ण समाज कमजोर होता है। हम जानते हैं कि किसी भी जाति के श्रेष्ठ व्यक्ति ने समाज और धर्म के हित के कार्य किए हैं, ऐसे सभी महापुरुषों को पूरे समाज ने आदर दिया है। पूज्य रविदास, पूज्य कबीर, वाल्मीकि जी, श्रद्धेय बी.आर. अंबेडकर इसके प्रमाण हैं। धर्म रक्षा हर जाति का परम धर्म है। यही हम सबकी मूल शक्ति है। संघ अपने संपूर्ण समाज को सब भेदभाव समाप्त कर बलशाली करने के प्रयास में लगा है। यह उद्गार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख सुरेशचंद्र ने रविवार को पोकरण में जाग्रत हिंदू महासंगम में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आज के विराट दृश्य का दर्शन संघ का विराट दर्शन है। संघ का कार्य 92 वर्षों से देश में चल रहा है। संघ संपूर्ण भारत में कार्य करने वाला हिंदू संगठन है। संघ निर्माता हेडगेवार ने समाज और राष्ट्र का गहन चिंतन किया और इस संघ कार्य को शुरू किया। संगठित हिंदू समाज ही सब समस्याओं का हल है।
हिंदू विचार क्या है
किस देश और किस धर्म में हमारा जन्म हो, जन्म तो परमात्मा देते हैं, ऐसा हमारे महापुरुषों ने कहा है। जिस देश-धर्म में हमारा परमात्मा ने जन्म दिया है, उस देश और धर्म की उन्नति करनी चाहिए और दूसरों के धर्म को कमजोर नहीं करना चाहिए। यदि विश्व के सभी धर्म इस बात को स्वीकारते हैं तो विश्व में कहीं भी अराजकता नहीं होगी। आतंकवादी घटनाएं नहीं होगी। आज अपने देश और धर्मों के अनावश्यक अहंकार के कारण विश्व आतंकवाद की चपेट में सर्वत्र दिखाई दे रहा है। इस राष्ट्र में सर्व धर्मों का आदर, धार्मिक उपासना की आजादी, लोकतंत्र की गारंटी तब तक ही है जब तक यहां हिंदू विचारधारा का प्रभाव है।
शरणार्थी और घुसपैठ में अंतर समझना होगा
उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी ने सब धर्मों की शरण स्थली भारत को बताया। विश्व में किसी भी धर्म-संस्कृति पर विपत्ति आई तो इसी भारत के समाज ने उन्हें शरण दी। यहूदी, पारसी आदि इसके प्रमाण हैै। लेकिन बर्मा के रोहिंग्या बड़ी मात्रा में पड़ोसी देशों से घुसपैठ के प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में हमें शरणार्थी और घुसपैठ में अंतर समझना होगा और पूरे समाज को इससे सजग रहना होगा।