
पोकरण. लाठी, धोलिया, भादरिया, ओढाणिया आदि गांवों के आसपास में बड़ी संख्या में गिद्धों की मौत हो रही है। हालांकि इन गिद्धों की मौत किसी बीमारी से नहीं हो रही है, बल्कि यहां लगी रेल पटरियां व उन पर पड़े अन्य पशुओं के शव इन गिद्धों के मौत के कारण बनते जा रहे है। यहां गत एक माह में करीब तीन दर्जन गिद्धों की मौत हो गई है, जो एक बहुत बड़ा आंकड़ा है। गौरतलब है कि गत 29 नवम्बर को धोलिया व चाचा के बीच रेलवे पटरी के किनारे डेढ दर्जन लुप्त हो रही दुर्लभ प्रजाति के गिद्धों के शव मिले थे। इन शवों को वन विभाग की टीम ने एकत्र कर उनका पोस्टमार्टम करवाकर उन्हें दफनाया गया था। एक सप्ताह बाद गुरुवार को पुन: क्षेत्र के ओढाणिया-चाचा रेलवे स्टेशन व लाठी-भादरिया रेलवे स्टेशन के बीच रेलवे ट्रेक के किनारे पिल्लर संख्या 214/1 व 219/2 के बीच करीब पांच किमी क्षेत्र में 13 गिद्धों व एक बाज का शव मिला। क्षेत्र में बड़ी संख्या में गिद्धों के शवों बिखरे होने की जानकारी मिलने पर अखिल भारतीय जीव रक्षा विश्रोई सभा के तहसील संयोजक व वन्यजीवप्रेमी राधेश्याम पेमाणी ग्रामीणों के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने इसकी सूचना पोकरण वन विभाग के अधिकारियों को दी। सूचना मिलने पर सहायक वनसंरक्षक ब्रजमोहन गुप्ता, वन विभाग वन्यजीव के क्षेत्रीय वन अधिकारी पूरणसिंह राठौड़ अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे तथा करीब पांच किमी क्षेत्र में बिखरे पड़े गिद्धों के शवों को एकत्र किया। उन्होंने बताया कि ओढाणिया-चाचा व लाठी-भादरिया रेलवे स्टेशन के बीच करीब पांच किमी में रेलवे पटरियों के किनारे 13 गिद्ध व एक बाज का शव मिला है। जिन्हें अपने कब्जे में लिया। जिनका लाठी पशु चिकित्सालय में पोस्टमार्टम करवाया।
रेल की चपेट में आने से होती है मौत
सहायक वन संरक्षक गुप्ता ने बताया कि लाठी, धोलिया, चांधन, चाचा, ओढाणिया सहित रेलवे पटरी के किनारे स्थित गांव पशु बाहुल्य क्षेत्र है। यहां रेलवे पटरी पर आ जाने से कई बार पशुओं की मौत हो जाती है। ऐसे पशुओं के कुछ शव पटरियों के किनारे पड़े है। गिद्ध मृत पशुओं को खाने के लिए आते है। ये गिद्ध जैसे ही यहां से रेल निकलती है, उस वक्त उसकी आवाज सुनकर उडकऱ भागने का प्रयास करते है। इसी दौरान वे रेल की चपेट में आ जाते है तथा उनकी मौत हो जाती है। उन्होंने बताया कि गुरुवार को लाठी रेलवे स्टेशन मास्टर व रेलवे विभाग के पीडब्ल्यूआई से भी बातचीत की व उन्हें ज्ञापन सुपुर्द कर रेलवे पटरियों पर पड़े मृत पशुओं को नियमानुसार एक किमी दूर फिकवाने का आग्रह किया। उन्होंने धोलिया गांव में पशुपालकों से भी अपने पशुओं को रेलवे पटरियों की तरफ जाने से रोकने व उनकी सुरक्षा करने की बात कही।