जैसलमेर. मरुस्थल की पहचान और संकटग्रस्त राज्य पक्षी गोडावण के संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क में कैप्टिव ब्रीडिंग कार्यक्रम के तहत 3 और गोडावणों को जंगल के प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया गया है। इसके साथ ही जंगल में छोड़े गए कैप्टिव ब्रीड गोडावणों की संख्या बढकऱ 7 हो गई है। करीब 6 माह की उम्र के इन पक्षियों को सुदासरी क्षेत्र में निर्धारित प्रक्रिया के तहत जंगल में छोड़ा गया। इस पूरी कवायद का उद्देश्य कृत्रिम परिवेश में जन्मे और पले गोडावणों को प्राकृतिक आवास में रहने तथा स्वतंत्र रूप से जीवनयापन करने के लिए तैयार करना है। गौरतलब है कि गोडावण संरक्षण के इस अभियान में राजस्थान वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआइआइ) के वैज्ञानिक संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं। तीनों पक्षियों को जंगल में छोडऩे से पहले उनके शरीर पर सैटेलाइट टैग लगाए गए हैं। इनकी मदद से वैज्ञानिक जंगल में पक्षियों की गतिविधियों, उनके विचरण क्षेत्र और व्यवहार पर नजर रख सकेंगे। इससे यह भी पता चल सकेगा कि प्राकृतिक वातावरण में पहुंचने के बाद ये पक्षी किस तरह स्वयं को परिस्थितियों के अनुरूप ढाल रहे हैं।