पश्चिमी राजस्थान में रेल कनेक्टिविटी का एक नया अध्याय शुरू हो गया है। लंबे इंतजार के बाद साबरमती–जोधपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस का विस्तार जैसलमेर तक कर दिया गया है।
पश्चिमी राजस्थान में रेल कनेक्टिविटी का एक नया अध्याय शुरू हो गया है। लंबे इंतजार के बाद साबरमती–जोधपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस का विस्तार जैसलमेर तक कर दिया गया है। नियमित संचालन शुरू होने के साथ अब यह सेवा केवल एक ट्रेन नहीं, बल्कि धार्मिक पर्यटन, व्यापार और सीमावर्ती अर्थव्यवस्था के लिए नए कॉरिडोर के रूप में देखी जा रही है। रेल नेटवर्क का प्रभाव केवल यात्रियों के आवागमन तक सीमित नहीं रहता। जहां सड़क और रेल कनेक्टिविटी मजबूत होती है, वहां निवेश, बाजार और रोजगार गतिविधियां भी तेजी पकड़ती हैं। सीमावर्ती क्षेत्र रामदेवरा, फलोदी और जैसलमेर के लिए इस विस्तार को उसी नजरिये से देखा जा रहा है।
► नियमित संचालन : 23 मई से शुरू
► ट्रेन संख्या : 20485 / 20486
► उद्घाटन ट्रेन : 22 डिब्बों के साथ संचालन
► प्रमुख कोच : एसी, थर्ड एसी, शयनयान, साधारण श्रेणी
► रामदेवरा स्टेशन : जिले में सर्वाधिक यात्री भार वाले स्टेशनों में शामिल
► अनुमानित यात्री भार : करीब 80 प्रतिशत यात्री रामदेवरा उतरते रहे हैं
धार्मिक नगरी रामदेवरा पहले से गुजरात के यात्रियों का प्रमुख केंद्र रही है। बाबा रामदेव के दर्शन के लिए गुजरात से हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। पहले यात्रियों को जोधपुर या अन्य माध्यमों से यात्रा करनी पड़ती थी। अब सीधी रेल सेवा समय और दूरी दोनों कम करेगी।
► धार्मिक पर्यटन का प्रवाह बढ़ सकता है
► होटल, परिवहन और स्थानीय बाजारों को लाभ मिलने की संभावना
► कृषि उत्पादों की तेज आवाजाही
► छोटे व्यापारिक केंद्रों का विस्तार
► वेयरहाउस और लॉजिस्टिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं
जैसलमेर, रामदेवरा और फलोदी क्षेत्र कृषि उत्पादन के नए केंद्र बनते जा रहे हैं। जीरा, मसाले, इसबगोल और स्थानीय उत्पादों के लिए गुजरात बड़ा बाजार माना जाता है। रेल संपर्क मजबूत होने से माल ढुलाई की लागत और समय दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
व्यापारिक गतिविधियों के जानकार मानते हैं कि बेहतर रेल संपर्क अक्सर छोटे शहरों को क्षेत्रीय व्यापार हब में बदलने की क्षमता रखता है।
परिवहन और क्षेत्रीय विकास विश्लेषक डॉ. एसके माथुर का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में मजबूत रेल कनेक्टिविटी का प्रभाव कई स्तरों पर दिखाई देता है। शुरुआती लाभ यात्रियों को मिलता है, लेकिन दीर्घकाल में पर्यटन, बाजार विस्तार और निवेश गतिविधियां बड़ा असर पैदा करती हैं। पश्चिमी राजस्थान के लिए यह रेल सेवा भविष्य की आर्थिक संरचना को मजबूत करने वाला कदम बन सकती है।