भीषण गर्मी के बीच मोहनगढ़ क्षेत्र में जल संकट ने गंभीर रूप ले लिया है। हालात ऐसे हैं कि जिस बाड़मेर लिफ्ट पेयजल परियोजना से सैकड़ों गांवों की प्यास बुझाई जा रही है, उसी के केंद्र में स्थित मोहनगढ़ गांव के लोग पानी के लिए तरस रहे हैं।
भीषण गर्मी के बीच मोहनगढ़ क्षेत्र में जल संकट ने गंभीर रूप ले लिया है। हालात ऐसे हैं कि जिस बाड़मेर लिफ्ट पेयजल परियोजना से सैकड़ों गांवों की प्यास बुझाई जा रही है, उसी के केंद्र में स्थित मोहनगढ़ गांव के लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। कई दिनों से घरों में जलापूर्ति ठप पड़ी है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। मजबूरी में लोग महंगे दामों पर टैंकर मंगवाकर पानी की व्यवस्था कर रहे हैं। बाड़मेर लिफ्ट परियोजना से जुड़े अधिशासी अभियंता नेमाराम ने बताया कि परियोजना की मुख्य डिग्गी पूरी तरह भरी हुई है और करीब 28 दिनों का पानी स्टॉक में उपलब्ध है।
योजना से जैसलमेर, बाड़मेर और बालोतरा जिलों के कुल 851 गांव जुड़े हुए हैं। इन क्षेत्रों में प्रतिदिन लगभग 100 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति की जा रही है, जिससे बड़ी आबादी को राहत मिल रही है। इसके बावजूद मोहनगढ़ में जल संकट का बने रहना कई सवाल खड़े करता है। वर्ष 2015 में मोहनगढ़ को इस परियोजना से जोड़ा गया था। उससे पहले जिम्मेदार विभाग ने करोड़ों रुपये खर्च कर बड़े-बड़े जलाशय और आधारभूत ढांचा तैयार किया था, जिनसे गांव और आसपास की ढाणियों को पानी उपलब्ध होता था। परियोजना से जुड़ने के बाद इन पुराने संसाधनों को नजरअंदाज कर दिया गया, जिससे वे धीरे-धीरे जर्जर हो गए और अब उपयोग योग्य नहीं रहे। ऑगमेंटेशन योजना लागू होने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हो सका। नई व्यवस्था पर पूरी निर्भरता के चलते पुरानी जलापूर्ति प्रणाली बंद कर दी गई, जिससे मोहनगढ़ की हालत और खराब हो गई। वर्तमान में उपलब्ध संसाधन गांव की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं हैं, जिसके कारण संकट गहराता जा रहा है।
पिछले महीने जिला प्रशासन ने आइएएस अधिकारी रोहित वर्मा को मौके पर निरीक्षण के लिए भेजा था। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट लेकर आवश्यक निर्देश दिए और 15 मार्च तक जलापूर्ति सुचारु करने का आश्वासन भी दिया गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक कोई ठोस सुधार नजर नहीं आया है।
नहरबंदी के चलते समस्या और बढ़ गई है। फिलहाल मोहनगढ़ को मुख्य लाइन से प्रतिदिन 20 से 25 लाख लीटर पानी दिया जा रहा है, लेकिन यह मात्रा गांव की जरूरतों के मुकाबले काफी कम है। इसके कारण लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा और हालात बदतर बने हुए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जब परियोजना में पर्याप्त पानी उपलब्ध है और अन्य गांवों को नियमित आपूर्ति दी जा रही है, तो मोहनगढ़ को इससे वंचित क्यों रखा जा रहा है। यह स्थिति विभागीय लापरवाही, समन्वय की कमी और योजनाओं के कमजोर क्रियान्वयन की ओर इशारा करती है।
ग्रामीणों ने जलापूर्ति व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त करने, पुराने जलस्रोतों को पुनः चालू करने और स्थायी समाधान लागू करने की मांग उठाई है। भीषण गर्मी के इस दौर में पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए संघर्ष प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।