पोकरण. कृषि विज्ञान केन्द्र सभागार में दो दिवसीय कृषक वैज्ञानिक संवाद का आयोजन किया गया। जिसमें पोकरण क्षेत्र के 25 किसानों ने भाग लिया।
पोकरण. कृषि विज्ञान केन्द्र सभागार में दो दिवसीय कृषक वैज्ञानिक संवाद का आयोजन किया गया। जिसमें पोकरण क्षेत्र के 25 किसानों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में संयुक्त निदेशक कृषि जयपुर पुखराज मानसन ने किसानों को आधुनिक खेती से जोडऩे तथा व्यवसाय के रूप में खेती को अपनाने की आवश्यकता बताई। जीवन रक्षक सिंचाई के लिए अधिक से अधिक वर्षा जल संग्रहण कर जल संरक्षण करते हुए शुष्क क्षेत्र में अधिक पैदावार लेने की बात कही। केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख चन्द्रप्रकाश मीणा, फसल वैज्ञानिक डॉ.कृष्ण गोपाल व्यास और प्रसार शिक्षा वैज्ञानिक सुनीलकुमार शर्मा ने किसानों की वर्तमान समय में फसलों में आ रही समस्याओं, जीरे, इसबगोल, चना, सरसों, गेहंू व सब्जियों में कीट व रोग तथा खरपतवार नियंत्रण, पाले से बचाव, उर्वरक व सिंचाई प्रबंधन को लेकर किसानों की समस्याओं के उपाय बताए। वर्तमान समय में मौसम के बदलाव को देखते हुए जीरे में झुलसा नियंत्रण के लिए 2-3 ग्राम मेन्कोजेब प्रतिलीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने व आवश्यकता पडऩे पर 10-15 दिन के अंतराल के बाद दोहराने की सलाह दी। साथ ही चैम्पा (मौयला) कीट दिखाई देने पर एक मिली डाईमेथोएट 30 ईसी प्रतिलीटर पानी के हिसाब से छिड़काव कर नियंत्रण करने सलाह दी। गिरते हुए तापमान को देखते हुए फसलों को पाले से बचाने के लिए सिंचाई करने व 0.1 प्रतिशत गंधक के तेजाब का छिड़काव करने की सलाह दी। मृदा स्वास्थ्य कार्ड में फसल वार की गई खाद व उर्वरक की अनुशंसा के हिसाब से उपयोग करने के बारे में बताया। सहायक कृषि अधिकारी मदनसिंह चम्पावत, सत्यनारायण यादव व महेंद्र यादव, कृषि पर्यवेक्षक भवानीशंकर व रमेशकुमार ने विभागीय योजनाओं से संबंधित किसानों की समस्याओं का समाधान किया। स्वच्छता पखवाड़े के मध्य नजर वर्मीकंपोस्टिंग, न्यूट्रिएंट कीटनाशकों, रसायनों के छिड़काव से पहले और बाद में अपनाई जाने वाली सावधानियां, अपशिष्ट प्रबंधन कर उन्होंने किसानों को ग्रामीण स्तर पर फसल अवशेष व कचरे से खाद बनाने, आय सृजन के लिए वर्मीकंपोस्ट व कम्पोस्ट खाद तैयार करने की विधि के बारे विस्तार से बात की।