जैसलमेर

वैज्ञानिकों ने देखी फसलें

वैज्ञानिकों ने देखी फसलें
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Aug 06, 2021
वैज्ञानिकों ने देखी फसलें
वैज्ञानिकों ने देखी फसलें

पोकरण. कृषि विज्ञान केन्द्र के कृषि वैज्ञानिकों ने क्षेत्र के छायण गांव में फसलों का जायजा लिया। खरीफ मौसम में किसानों ने मूंगफली में प्रमुख कीट लगने की आशंका रहती है। वैज्ञानिकों ने बताया कि दीमक व गोजा लट मुख्य रूप से पौधे की जड़ों को खा जाती है। जिससे पौधे की पत्तियां पीली हो जाती है एवं पौधे को उखाड़कर देखने पर जड़ कटी हुई दिखाई पड़ती है और पौधे सूख जाते है। शस्य वैज्ञानिक डॉ.केजी व्यास ने बताया कि इसके उपचार के लिए किसानों को क्लोरोपाइरीफास चार लीटर प्रतिहेक्टेयर की दर से सिंचाई के पानी के साथ देना चाहिए, ताकि दवाई पौधे की जड़ों तक पहुंच जाए। मूंगफली मे जड़ गलन होने पर पौधे की जड़ काली पड़कर गलने लग जाती है, पौधे की पत्तियां झुलसकर सूख जाती है। इसके प्रभावी नियंत्रण के लिए वैज्ञानिकों ने एक किलो कार्बेण्डाजिम अथवा मेंकोजेब प्रतिहेक्टयर की दर से ड्रेंचिंग अथवा सिंचाई जल का उपयोग करने को लाभदायक बताया। मृदा वैज्ञानिक डॉ.बबलू शर्मा ने बताया कि इस फसल का अच्छा उत्पादन प्राप्त करने के लिए नत्रजन, फास्फोरस व पोटाश के साथ कैल्शियम एवं सल्फर तत्वों का प्रयोग जरूरी है। प्रसार वैज्ञानिक सुनीलकुमार शर्मा ने फसल के लिए कीट एवं रोग प्रबंधन को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि मूंगफली में पीलापन दिखाई देने पर पांच ग्राम फेरस सल्फेट के साथ एक ग्राम साइट्रिक अम्ल को एक लीटर पानी मे मिलाकर छिड़काव करना प्रभावी रहता है। डॉ.रामनिवास ने बताया कि खेत की मिट्टी को ट्राइकोडर्मा से शोधित करें और खेतों में गोबर की खाद डालें। इससे जमीन में सूक्ष्म लाभदायक जीवों की जनसंख्या बढ़ जाती है, जो हानिकारक जीवों को कम कर देते हैं।

Published on:
06 Aug 2021 02:41 pm