जैसलमेर जिले में बीते लंबे समय से 10 और 20 रुपए के नए नोटों की भारी किल्लत बनी हुई है। यह समस्या अब केवल आम लेन-देन तक सीमित नहीं रही, बल्कि शादी-विवाह और अन्य मांगलिक आयोजनों पर सीधा असर डालने लगी है। नेग, शगुन और परंपरागत रस्मों में नए छोटे नोटों की विशेष आवश्यकता होती […]
जैसलमेर जिले में बीते लंबे समय से 10 और 20 रुपए के नए नोटों की भारी किल्लत बनी हुई है। यह समस्या अब केवल आम लेन-देन तक सीमित नहीं रही, बल्कि शादी-विवाह और अन्य मांगलिक आयोजनों पर सीधा असर डालने लगी है। नेग, शगुन और परंपरागत रस्मों में नए छोटे नोटों की विशेष आवश्यकता होती है, लेकिन बैंकों से नई करेंसी उपलब्ध नहीं होने के कारण आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शहर के अधिकांश राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों में स्थिति यह है कि काउंटर पर छोटे मूल्य वर्ग के नए नोट मांगे जाने पर या तो ' उपलब्ध नहीं ' कह दिया जाता है या फिर ग्राहकों को लंबा इंतजार करने की सलाह दी जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में हालात और भी खराब हैं, जहां शाखाओं में महीनों से नई छोटी करेंसी आई ही नहीं है। बैंक अधिकारियों का तर्क है कि रिजर्व बैंक से सप्लाई सीमित मात्रा में हो रही है, जबकि मांग लगातार बनी हुई है।
किल्लत का सीधा फायदा कालाबाजारी करने वाले तत्व उठा रहे हैं। शहर के बाजारों और कुछ निजी संपर्कों के जरिये नए 10 और 20 के नोट तय कीमत से अधिक दाम पर बेचे जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, 1000 रुपए की नई छोटी करेंसी के बदले 1200 से 1300 रुपए तक वसूले जा रहे हैं। वहीं 20 के नोटों की गड्डी पर तो 500 रुपए तक ज्यादा वसूले जा रहे हैं । मजबूरी में लोग यह अतिरिक्त रकम देने को विवश हैं, क्योंकि सामाजिक परंपराओं के चलते नए नोटों की अनदेखी करना संभव नहीं होता। यहां तक कि लोग ब्लैक में जोधपुर और अहमदाबाद आदि बाहरी शहरों से नई करेंसी मंगवाने के लिए विवश हैं।
जानकारों का कहना है कि शादी-ब्याह का सीजन शुरू होते ही इस समस्या ने और गंभीर रूप ले लिया है। आयोजकों और परिवारों को समय रहते पर्याप्त मात्रा में छोटे नए नोट नहीं मिल पा रहे, जिससे अंतिम समय में अफरा-तफरी की स्थिति बन रही है। कई लोगों ने बैंकों और प्रशासन से इस दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की है। आदित्य कुमार का कहना है कि यदि समय रहते छोटे नोटों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई, तो कालाबाजारी और अधिक बढ़ेगी। गंगा देवी ने मांग की कि भारतीय रिजर्व बैंक और जिला प्रशासन मिलकर बैंकों को मांग के अनुरूप नई छोटी करेंसी उपलब्ध कराएं, ताकि परंपराओं के निर्वहन में लोगों को अनावश्यक आर्थिक और मानसिक बोझ न उठाना पड़े।
जैसलमेर में छोटे नोटों की सप्लाई आरबीआइ से कम हो रही है। गत दिनों हमने 10 के 100 नोट के साथ सिक्के दिए भी थे। इसके लिए लाइन लगवाई गई। अब और करेंसी आएगी तो मरु महोत्सव के अवसर पर लोगों को उपलब्ध करवाएंगे। नई करेंसी की कालाबाजारी करने वालों की पुख़्ता जानकारी मिली तो पुलिस कार्रवाई करवाई जाएगी।