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पोकरण बस स्टैंड : भीड़ बढ़ी, सुविधाएं गायब… इंतजार में थकते मुसाफिर

पोकरण कस्बे से विभिन्न रूटों सहित ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित होने वाली बसों एवं यात्रियों की सुविधा के लिए वर्षों पूर्व निर्माण करवाए गए केन्द्रीय बस स्टैंड में गत डेढ़ दशक से कोई विकास कार्य नहीं हुआ है।

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पोकरण कस्बे से विभिन्न रूटों सहित ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित होने वाली बसों एवं यात्रियों की सुविधा के लिए वर्षों पूर्व निर्माण करवाए गए केन्द्रीय बस स्टैंड में गत डेढ़ दशक से कोई विकास कार्य नहीं हुआ है। जिससे यहां अव्यवस्थाओं का साम्राज्य है व यात्रियों को परेशानी हो रही है। जानकारी के अनुसार रोडवेज और निजी बसों के लिए करीब 5-6 दशक पूर्व नगरपालिका की ओर से जोधपुर रोड पर केन्द्रीय बस स्टैंड स्थापित किया गया था। निर्माण के बाद समय-समय पर मरम्मत व जीर्णोद्धार का कार्य भी चला। वर्ष 2012 में नगरपालिका की ओर से आइडीएसएमटी योजना के अंतर्गत विकास कार्य स्वीकृत किए गए। जिसके अंतर्गत बस स्टैंड परिसर में डामर सड़क, नालियां, चारदीवारी, विश्राम गृह में फर्श, शौचालय, दो मुख्य द्वार सहित अन्य कार्य करवाए जाने थे। इनमें से कुछ कार्य पूर्ण किए गए, जबकि अन्य कार्य अधूरे ही छोड़ दिए गए, जो आज भी उसी हालात में पड़े है। बीते डेढ़ दशक में नगरपालिका ने कभी भी बस स्टैंड के जीर्णोद्धार को लेकर जहमत नहीं उठाई। ऐसे में यहां व्याप्त अव्यवस्थाओं से यात्रियों को परेशानी से रूबरू होना पड़ रहा है।

सड़क हो गई जमींदोज, उड़ती रेत से बेहाल

बस स्टैंड में वर्षों पूर्व निर्माण करवाई गई डामर सड़क पूरी तरह से जमींदोज हो गई है। वर्ष 2012-13 में डामर सड़क का कार्य शुरू कर उसे अधूरा ही छोड़ा गया था, जो आज तक पूरा नहीं हो पाया है। उस समय बिछाई गई कंकरीट भी अब गायब हो चुकी है। बस स्टैंड में चारों तरफ सड़क का नामोनिशान ही गायब हो चुका है। वाहन चालकों व यात्रियों को परेशानी हो रही है। विशेष रूप से बारिश के दौरान यहां चारों तरफ पानी जमा हो जाता है, ऐसे में यात्रियों व वाहनों का निकलना भी दुश्वार हो जाता है।

क्षतिग्रस्त हो रहा विश्राम गृह, पशुओं का डेरा

करीब दो दशक पूर्व यहां एक विश्राम गृह का निर्माण करवाया गया था, जो उस समय से ही अधूरा पड़ा है। हालांकि कुछ समय बाद विश्राम गृह में कोटास्टोन के पत्थर लगाए गए, लेकिन वे भी अब उखड़कर टूट चुके है। साथ ही यहां बेसहारा पशुओं का जमावड़ा लगा हुआ है। ऐसे में यात्रियों का यहां बैठना तो दूर खड़े रह पाना भी मुश्किल हो रहा है। इसके अलावा पशुओं की ओर से यहां कचरा व गंदगी बिखेर दिए जाने से यात्रियों को परेशानी हो रही है।

दर्जनों बसों का होता है संचालन

केन्द्रीय बस स्टैंड से प्रतिदिन कस्बे से निकलने वाली सभी रोडवेज बसों का संचालन होता है। इसके अलावा बाड़मेर, बालोतरा, सांचौर, बायतु, फलसूंड, राजमथाई, बांधेवा, बारठ का गांव, रातडिय़ा, कलाऊ, शेरगढ़, सोमेसर आदि रूटों पर निजी बसों का संचालन होता है। इनमें प्रतिदिन दो हजार से अधिक यात्री सफर करते है, जबकि बस स्टैंड में सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है। छाया, पानी सहित विश्राम की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण यात्रियों को परेशानी हो रही है।