जैसलमेर

अपना पैसा पाने को जद्दोजहद. सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक की बदहाली उजागर

जैसलमेर जिले के किसानों और मजदूरों के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले जैसलमेर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक की माली हालत पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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Feb 13, 2026

जैसलमेर जिले के किसानों और मजदूरों के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले जैसलमेर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक की माली हालत पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि खाताधारकों को अपना ही जमा पैसा निकालने के लिए बैंक अधिकारियों के आगे गिड़गिड़ाना पड़ रहा है। ग्रामीण शाखाओं की स्थिति तो और भी चिंताजनक है—अधिकांश शाखाओं पर अक्सर ताले लटके मिलते हैं।

जिससे दूर-दराज के गांवों से जैसलमेर मुख्यालय तक किसान, मजदूर आदि पहुंचते हैं और यहां आकर भी उनके हाथ निराशा ही लग रही है। शहर स्थित मुख्य शाखा में खाताधारकों को महज यह बताया जा रहा है कि उनके खाते में कितना पैसा है। पैसा कब मिलेगा, यह आगे से फंड आने पर निर्भर बताया जाता है। ऐसे में बसों आदि का किराया खर्च कर किसी तरह यहां पहुंचने वाले ग्रामीण निराश होकर लौटने को मजबूर होते हैंं। यह पैसा किसान सम्मान निधि से लेकर प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा में मजदूरी आदि का है। यह धन खाताधारकों के हक का है। महज चंद हजार रुपए का भुगतान लेने के लिए वे दर-बदर होने को विवश हो रहे हैं।

कभी पैसा नहीं तो कभी सिस्टम डाउन

खाताधारकों का कहना है कि उन्हें फसल कटाई और खाद-बीज, डीजल और मजदूरी के भुगतान के लिए नगदी की सख्त जरूरत होती है, लेकिन बैंक में या तो कैश की कमी बताई जाती है या सिस्टम डाउन होने का हवाला दिया जाता है। कई ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि एक-एक हजार, दो-दो हजार रुपए के लिए घंटों कतार में खड़े रहने के बाद भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है। मजदूर वर्ग, जिनकी रोजी-रोटी रोज की मजदूरी पर निर्भर है, उनके लिए यह स्थिति और भी त्रासद बन गई है। पिछले दिनों गड़ीसर मार्ग स्थित मुख्य शाखा के बाहर सडक़ पर कुछ देर के लिए खाताधारकों ने जाम भी लगा दिया था। दूसरी तरफ पैसा नहीं होने से लेकर स्टाफ की कमी के चलते ग्रामीण क्षेत्रों की लगभग शाखाओं में ताले लटके हुए हैं। जानकारी के अनुसार इस बैंक की जैसलमेर जिले में जैसलमेर और पोकरण सहित चांधन, रामगढ़, मोहनगढ़, राजमथाई, रामदेवरा, सुल्ताना, नाचना, फतेहगढ़ में कुल 10 बैंक शाखाएं हैं। गांवों में समय पर शाखा नहीं खुलने से बुजुर्ग पेंशनभोगी और महिलाएं खास तौर पर परेशान हैं। तपती धूप में घंटों इंतजार के बाद जब शाखा बंद मिलती है, तो लोगों की पीड़ा का अनुमान लगाया जा सकता है। कई गांवों में तो लोग यह कहने लगे हैं कि बैंक सिर्फ नाम का रह गया है।

हमारे साथ की जा रही टालमटोल

खाताधारकों का आरोप है कि छोटे किसानों और मजदूरों को टालमटोल का सामना करना पड़ता है। खुमाणसिंह ने बताया कि हमें अपना ही पैसा पाने के लिए रोज चक्कर लगाने पड़ते हैं। फोटे खां ने बताया कि जब अपना ही जमा धन समय पर नहीं मिल पा रहा, तो फिर बैंकिंग व्यवस्था पर भरोसा कैसे कायम रहे? महिला खाताधारक हुरमत के अनुसार हम चक्कर काट-काट कर परेशान हो रहे हैं। हमें पैसों की सख्त जरूरत है। ग्रामीणों ने इस मामले में जिला प्रशासन और बैंक प्रबंधन से शाखाओं में नियमित कैश उपलब्धता सुनिश्चित करने, पर्याप्त स्टाफ नियुक्त करने और शिकायत निवारण तंत्र को सक्रिय बनाने की मांग की है।

जल्द दिलाएंगे भुगतान

फंड की व्यवस्था नहीं होने से जेसीसीबी के खाताधारकों को पिछले दिनों से भुगतान नहीं किया गया है। अब कुछ फंड मिला है तो आगामी सप्ताह में लोगों को पंक्तियों में खड़ा करवाकर उनका भुगतान दिलाने का प्रयास किया जाएगा। बैंक की आर्थिक स्थिति पिछले कई वर्षों से पटरी पर नहीं है।

  • ओमपाल सिंह भाटी, प्रबंध निदेशक, जेसीसीबी, जैसलमेर
Published on:
13 Feb 2026 09:35 pm
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