
जैसलमेर। कहीं भाई की कलाई पर राखी बांधती बहन, कहीं तिलक लगाकर मिठाई खिलाती बहनें और कहीं उपहार चुनते भाई... रक्षाबंधन पर स्वर्णनगरी की तस्वीर कुछ ऐसी ही रही। सुबह से शुरू हुई राखी बांधने की रफ्तार देर शाम तक बनी रही। घरों से लेकर बाजारों तक त्योहार की चहल-पहल दिखाई दी और रिश्तों के इस पर्व में परंपरा के साथ बदलते समय की झलक भी नजर आई। श्रावण शुक्ल पूर्णिमा पर राखी बांधने का मुहूर्त दिनभर रहने से परिवारों को सुविधानुसार पर्व मनाने का अवसर मिला। बहनों ने भाइयों के ललाट पर अक्षत-तिलक लगाया, कलाई पर राखी बांधी और मिठाई खिलाकर उनके सुखी एवं मंगलमय जीवन की कामना की। भाइयों ने भी बहनों को सामर्थ्य के अनुसार नगद राशि और उपहार भेंट किए। रक्षाबंधन का उत्साह घरों तक सीमित नहीं रहा। गोपा चौक, दुर्ग, गड़ीसर रोड, आसनी रोड, सदर बाजार, गांधी चौक और कचहरी रोड सहित शहर के प्रमुख बाजारों में दिनभर आवाजाही बनी रही। सजी-धजी महिलाएं और युवतियां राखियां खरीदती नजर आईं तो भाई बहनों के लिए पसंदीदा उपहार तलाशते दिखाई दिए। मिठाई की दुकानों पर भी ग्राहकों की अच्छी भीड़ रही। ज्वैलरी और गिफ्ट आर्टिकल्स की दुकानों पर भी खरीदारी का असर दिखाई दिया। रक्षाबंधन ने छोटे-बड़े बाजारों को एक दिन के लिए रिश्तों की खरीदारी के केंद्र में बदल दिया।
इस बार राखियों के बाजार में परंपरा के साथ प्रयोग भी दिखाई दिया। सामान्य धागे और पारंपरिक डिजाइन वाली राखियों के साथ इलेक्ट्रॉनिक, फैंसी, खुशबूदार और धातु से बनी राखियां भी लोगों का ध्यान खींचती रहीं।
नई पीढ़ी के बीच आकर्षक डिजाइन और अलग लुक वाली राखियों की पसंद बढ़ती दिखाई दी। यानी राखी अब केवल रक्षा सूत्र नहीं, बल्कि पसंद और व्यक्तित्व से जुड़ी छोटी-सी अभिव्यक्ति भी बनती जा रही है।
- राखी: पारंपरिक डिजाइन के साथ इलेक्ट्रॉनिक और फैंसी राखियों की मौजूदगी बढ़ी।
- बाजार: मिठाई, ज्वैलरी और गिफ्ट दुकानों पर दिनभर ग्राहकों की भीड़।
- उपहार: नगद राशि के साथ पसंद आधारित उपहार देने का चलन दिखा।
- भोजन: घर के पारंपरिक भोजन के साथ होटल-रेस्टोरेंट में पारिवारिक आयोजन।
- परंपरा: श्रावणी कर्म के साथ रक्षा सूत्र बांधने की धार्मिक परंपरा कायम।
रक्षाबंधन के आयोजन का तरीका भी बदलता दिखाई दिया। कई परिवारों ने बहनों और बेटियों के परिवार को घर बुलाकर भोजन कराया। वहीं कुछ परिवारों ने घर के बजाय होटल या रेस्टोरेंट में साथ बैठकर भोजन करना पसंद किया।
यह बदलाव सिर्फ खानपान तक सीमित नहीं है। व्यस्त होती जीवनशैली में परिवार के साथ समय बिताने के लिए लोग सुविधाजनक विकल्प चुन रहे हैं। रक्षाबंधन इस बदलाव का भी एक सामाजिक आईना बनता दिखाई दिया।
श्रावण शुक्ल पूर्णिमा पर शहर में श्रावणी कर्म भी आयोजित किए गए। ब्राह्मणों ने यजमानों को रक्षा सूत्र बांधा और रक्षा का वचन लिया। इस तरह एक ही दिन स्वर्णनगरी में परंपरा और आधुनिकता दोनों की तस्वीर दिखाई दी।
एक तरफ धार्मिक विधि-विधान और परिवार की पुरानी परंपराएं कायम रहीं, दूसरी तरफ राखी के डिजाइन, उपहारों की पसंद और भोजन के तरीके बदलते नजर आए। रिश्तों की डोर वही रही, लेकिन उसे निभाने और मनाने का अंदाज जरूर बदल गया।