
51 गांव व 415 ढाणियों में टैंकर बुझाएंगे प्यास
-प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को भिजवाए, स्वीकृति मिलते ही शुरू होगा कार्य
पोकरण(जैसलमेर). दूरस्थ गांवों व ढाणियों में भीषण गर्मी के मौसम में भी पेयजल व्यवस्था सुचारु रहे, इसके लिए जलदाय विभाग ने कमर कस ली है। अंतिम छोर पर स्थित गांवों व ढाणियों में पेयजल आपूर्ति नहीं होने की स्थिति में जलदाय विभाग की ओर से टैंकरों से जलापूर्ति कर ग्रामीणों व पशुधन को राहत पहुंचाई जाएगी। जिसको लेकर विभागीय स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई है तथा स्थानों का चिन्हीकरण कर प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। शीघ्र ही गांवों व ढाणियों में टैंकरोंं से जलापूर्ति की जाएगी। जलदाय विभाग की ओर से पोकरण व भणियाणा उपखण्ड क्षेत्र में गांवों व ढाणियों का चिन्हीकरण किया गया है। इसके अलावा पशुखेलियों, पशुकुण्डों व विद्यालयों का भी चयन किया गया है, जिन स्थलों पर पर्याप्त जलापूर्ति नहीं हो पा रही है। उनकी सूची तैयार कर उच्चाधिकारियों को भिजवाई गई है। जहां से स्वीकृति मिलते ही टैंकरों से जलापूर्ति शुरू कर दी जाएगी।
उत्पन्न नहीं होगी पेयजल संकट की स्थिति
विभाग ने टैंकरों से जलापूर्ति के लिए सूची तैयार कर उच्चाधिकारियों को भिजवा दी है। शीघ्र ही स्वीकृति मिलते ही टैंकरों से जलापूर्ति का कार्य शुरू किया जाएगा। क्षेत्र में कहीं पर भी पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न नहीं होने दी जाएगी।
-दिनेशकुमार नागौरी, अधिशासी अभियंता जलदाय विभाग, पोकरण।
इनका हुआ चयन
जलदाय विभाग की ओर से पोकरण व भणियाणा उपखण्ड में गांवों, ढाणियों, पशुखेलियों, पशुकुण्डों व विद्यालयों का चयन किया गया है। पोकरण उपखण्ड क्षेत्र में 40 गांव, 255 ढाणियां, 34 पशुखेलियां व पशुकुण्ड एवं 32 विद्यालय है। इसी प्रकार भणियाणा उपखण्ड में 11 गांव, 160 ढाणियां, 17 पशुखेलियां व पशुकुण्ड एवं 10 विद्यालय है, जहां भीषण गर्मी के दौरान पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इन जगहों पर टैंकरों से जलापूर्ति की जाएगी तथा पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न नहीं होने दी जाएगी। सप्ताह में मिल सकती है स्वीकृति
जलदाय विभाग की ओर से प्रस्ताव बनाकर अधीक्षण अभियंता व जिला कलक्टर को भिजवाए गए है। उनकी ओर से सूची को स्वीकृत किया जाएगा तथा टैंकरों से जलापूर्ति के आदेश दिए जाएंगे। इसके लिए निविदाएं भी लग चुकी है। प्रति टैंकर दर निर्धारित करने के बाद एक सप्ताह में टैंकर शुरू करने के आदेश दे दिए जाएंगे। इसके बाद भीषण गर्मी के दौरान टैंकरों से जलापूर्ति की जाएगी।