
शिक्षा विभाग का कार्यालय।
जैसलमेर। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और विभाग में पदोन्नति की प्रतीक्षा, शिक्षा व्यवस्था की दो बड़ी चुनौतियां बनकर सामने हैं। प्रदेश में तृतीय श्रेणी शिक्षक से प्राचार्य तक के 1 लाख 8 हजार 955 पद रिक्त हैं। दूसरी ओर पदोन्नति की पात्रता रखने वाले हजारों शिक्षक और अधिकारी डीपीसी का इंतजार कर रहे हैं। यानी स्कूलों में पद खाली हैं, कार्मिक अगली जिम्मेदारी संभालने के पात्र हैं, लेकिन विभागीय पदोन्नति समितियों की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से पदोन्नति की राह आगे नहीं बढ़ पा रही।
राज्य सरकार ने बजट वर्ष 2026-27 में सेवा नियमों के तहत निर्धारित अनुभव अवधि में दो वर्ष तक की छूट देने की घोषणा की थी। इसके अनुपालन में 17 अगस्त 2026 को अधिसूचना भी जारी कर दी गई, लेकिन विभिन्न संवर्गों में डीपीसी अब तक लंबित है। इस बीच कार्मिक विभाग की शासन सचिव अर्चना सिंह ने 28 अक्टूबर को जारी परिपत्र में सभी प्रशासनिक विभागों, विभागाध्यक्षों और जिला कलेक्टरों को 15 नवंबर 2026 तक नियमित डीपीसी पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इससे पदोन्नति की आस लगाए बैठे कार्मिकों को नई समय-सीमा मिली है।
जैसलमेर, बाड़मेर और बालोतरा के आंकड़े शिक्षकों की कमी की तस्वीर सामने रखते हैं। तीनों जिलों में वरिष्ठ अध्यापक के 5,522 पद रिक्त हैं। प्राचार्य के 983 और अध्यापक संवर्ग के 4,533 पद भी खाली हैं। विषयवार शिक्षकों की कमी के बीच इन रिक्तियों का सीधा संबंध विद्यालयों की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था से है।
जैसलमेर : वरिष्ठ अध्यापक 1,179, अध्यापक 1,102 और प्राचार्य 204 पद रिक्त।
बाड़मेर : वरिष्ठ अध्यापक 2,647, अध्यापक 2,217 और प्राचार्य 487 पद रिक्त।
बालोतरा : वरिष्ठ अध्यापक 1,696, अध्यापक 1,214 और प्राचार्य 292 पद रिक्त।
शिक्षा विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में वरिष्ठ अध्यापक के 51,191 पद रिक्त हैं। अध्यापक लेवल-1 के 20,758, लेवल-2 के 15,896, व्याख्याता के 14,674 और प्राचार्य के 6,436 पद खाली हैं। वरिष्ठ अध्यापक से लेकर जिला शिक्षा अधिकारी, उपनिदेशक और संयुक्त निदेशक स्तर तक विभिन्न संवर्गों में डीपीसी लंबित होने से पदोन्नति की पूरी श्रृंखला प्रभावित हो रही है।
वरिष्ठ अध्यापक : 51,191 अध्यापक लेवल-1 : 20,758 अध्यापक लेवल-2 : 15,896 व्याख्याता : 14,674 प्राचार्य : 6,436 कुल रिक्त पद : 1,08,955
कार्मिक विभाग के 26 अगस्त 2023 के परिपत्र के अनुसार वरिष्ठता सूचियां तैयार कर वार्षिक समय-सारणी के अनुरूप डीपीसी आयोजित की जानी थी। निर्धारित कार्यक्रम में पदोन्नति संबंधी कार्रवाई 31 मई तक पूरी होनी थी, लेकिन कई संवर्गों में प्रक्रिया लंबित रह गई। अब 28 अक्टूबर के नए निर्देशों के बाद 15 नवंबर की समय-सीमा अहम हो गई है। चुनौती केवल डीपीसी आयोजित करने की नहीं, बल्कि पात्र कार्मिकों को पदोन्नति आदेश जारी करने की भी है।
प्रदेश में एक लाख से अधिक पद रिक्त हैं और दूसरी ओर पात्र शिक्षक पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। जिन संवर्गों में न्यायालयीन अथवा अन्य वैधानिक बाधा नहीं है, उनकी डीपीसी तत्काल आयोजित कर पदोन्नति आदेश जारी किए जाने चाहिए। केवल समय-सीमा निर्धारित करना पर्याप्त नहीं है, उसका समयबद्ध क्रियान्वयन भी जरूरी है। पदोन्नति में देरी कार्मिकों के मनोबल के साथ विद्यालयों की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था को भी प्रभावित करती है।
- मोहर सिंह सलावद, प्रदेशाध्यक्ष, शिक्षक संघ रेसटा, राजस्थान।
Updated on:
1 Nov 2026, 8:30 PM IST
Published on:
1 Nov 2026, 8:30 PM IST
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