सरहदी जिले में स्थित बाबा रामदेव की कर्मस्थली रामदेवरा गांव में सामाजिक एकता मंच की ओर से रविवार को मारवाड़ महासम्मेलन का आयोजन किया गया।
सरहदी जिले में स्थित बाबा रामदेव की कर्मस्थली रामदेवरा गांव में सामाजिक एकता मंच की ओर से रविवार को मारवाड़ महासम्मेलन का आयोजन किया गया। महा सम्मेलन में प्रदेश भर के विभिन्न जिलों से सैकड़ों लोगों ने भाग लिया और सामाजिक समरसता व एकता का संदेश दिया। इस मौके पर मुख्य वक्ता भामाशाह व उद्योगपति मेघराजसिंह रॉयल ने संबोधित करते हुए महासम्मेलन के उद्देश्यों की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी इतिहास को भूलती जा रही है। इसलिए सभी का दायित्व है कि आने वाली पीढ़ी को इतिहास की जानकारी दें और संस्कारों से युक्त शिक्षा दिलाएं। उन्होंने कहा कि आने वाला समय आर्थिक युग का है। ऐसे समय में मारवाड़ में सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी की है, इसके लिए युवाओं व युवतियों को उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा अर्जित करने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि राजस्थान की भूमि महत्वपूर्ण है। यहां कई प्रकार के खनिजों का उत्पादन होता है। विशेष रूप से सौर ऊर्जा को लेकर पश्चिमी राजस्थान महत्वपूर्ण है। उन्होंने सौर ऊर्जा के माध्यम से बिजली उत्पादन करने और आय के स्त्रोत बनाने को लेकर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरहदी जैसलमेर जिले के साथ पश्चिमी राजस्थान में लोगों के पास पर्याप्त जमीन उपलब्ध है। यहां वे सौर ऊर्जा प्लांट लगाकर बिजली उत्पादन का कार्य करते है तो उन्हें रोजगार मिलने के साथ प्रदेश विकास के पथ पर आगे बढ़ेगा। इस मौके पर उन्होंने सामाजिक एकता, पर्यावरण संरक्षण, आर्थिक सशक्तीकरण और संस्कार व संस्कृति को लेकर भी विचार व्यक्त किए। उन्होंने सर्वसमाज के लोगों से एकजुट होकर कार्य करने की बात कही।
रामदेवरा में आयोजित मारवाड़ महासम्मेलन के दौरान मंच पर सर्वोदय कलश स्थापित किया गया। अतिथियों ने बाबा रामदेव की तस्वीर पर पुष्प अर्पित किए। साथ ही सर्वसमाज की ओर से छोटे कलश से पानी लेकर इस सर्वोदय कलश में भरकर सामाजिक समरसता, एकता, भाईचारे का संदेश दिया गया।
इस मौके पर डॉ. अमरीकसिंह और डॉ. विक्रमसिंह तोमर ने सामाजिक एकता मंच व फाउंडेशन की ओर से किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। साथ ही महासम्मेलन के आयोजन के उद्देश्यों, आमजन की जिम्मेवारी, सामाजिक समरसता के संदेश को लेकर विचार रखे। कार्यक्रम के दौरान युवा नेता अरविंदसिंह, मोतीसिंह जोधा, बाबूखां सनावड़ा, माधुसिंह उदट, आशा मेघवाल भीलवाड़ा, आसूराम, लोकेन्द्र, संत ओमदास महाराज, भोजाराम मेघवाल बाड़मेर, मुकेश मेघवाल, मौलाना अरशद आदि वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए।