जीरा उत्पादन के मामले में सीमावर्ती जैसलमेर जिला निरंतर रिकॉर्ड कायम कर रहा है। यहां के किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाने के लिए पिछले साल से जिले में जीरा मंडी का आगाज किया गया।
जीरा उत्पादन के मामले में सीमावर्ती जैसलमेर जिला निरंतर रिकॉर्ड कायम कर रहा है। यहां के किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाने के लिए पिछले साल से जिले में जीरा मंडी का आगाज किया गया। पहले साल कृषि उपज मंडी परिसर में ही जीरा मंडी का संचालन किया गया। गत वर्ष 26 मार्च को यह मंडी शुरू हुई लेकिन यहां लाकर जीरा की फसल बेचने के प्रति स्थानीय किसानों का वांछित रुझान नहीं दिखा और बाद में भाव अच्छे नहीं आने पर किसानों ने माल को संग्रहित किए रखा। उसके बाद बॉर्डर पर तनाव की स्थितियां बनने की स्थिति में जीरा मंडी बंद करनी पड़ी। अब एक बार फिर आगामी जीरा की फसल की उपज बाजार में लाने के समय इस मंडी को शुरू करवाया जाएगा। गौरतलब है कि जिले के किसान अपना माल ऊंझा या धानेरा जैसे गुजरात के मंडी केंद्रों पर बेचते रहे हैं और छोटे किसान, जिनके पास सीमित मात्रा में जीरा होता है, वे स्थानीय व्यापारियों को जीरा बेचते हैं। व्यापारी कम कीमत पर माल खरीदकर बेहतर भाव मिलने का इंतजार करते हैं। जानकारों का मानना है कि जैसलमेर में जीरा मंडी की स्थापना से छोटे किसानों को अपनी फसल का बेहतर मूल्य मिलेगा।
जानकारी के अनुसार कृषि उपज मंडी परिसर में जीरा मंडी के लिए जरूरी प्लेटफार्मों, सडक़ निर्माण और 20 दुकानें बनाने के लिए यहां से 2.80 करोड़ रुपए स्वीकृत करने के प्रस्ताव कृषि निदेशालय को भिजवाए गए थे लेकिन निदेशालय ने फिलहाल उपलब्ध आधारभूत संसाधनों से जीरा मंडी का संचालन करने के लिए निर्देशित किया है। इससे पहले जैसलमेर में जीरा मंडी की अलग से स्थापना करने के लिए जमीन आवंटन का प्रस्ताव भी था लेकिन वह संभव नहीं हो पाया।
जैसलमेर में किसानों को स्थानीय व्यापारी और बाहर के थोक कारोबारी उनके खेतों से ही जीरे की उपज का उठाव करने का सुविधा देते हैं। व्यापारियों के प्रतिनिधि खेतों तक पहुंच कर जीरा की गुणवत्ता के आधार पर किसानों से भाव तय करते हैं और आपसी रजामंदी बनने पर खेतों से अपने साधनों से माल उठा लेते हैं। इस कारण भी जिले के किसान अभी तक मंडी तक आकर जीरा बेचने का मन नहीं बना पा रहे हैं।
जैसलमेर में कृषि उपज मंडी परिसर में ही जीरा मंडी की शुरुआत गत वर्ष की गई थी। इस बार भी फसल आने के बाद किसानों को यहां अपना उत्पाद बेचने की सुविधा मुहैया करवाई जाएगी। फिलहाल उपलब्ध आधारभूत संरचना से काम चलाया जाएगा।