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25 करोड़ की योजना, नई सड़कों की खुदाई…गंदे पानी निकासी पर सवाल

राज्य सरकार की बजट घोषणा के बाद कस्बे में सीवरेज लाइन बिछाने का कार्य शुरू हो गया है, लेकिन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की जगह अब तक तय नहीं हो सकी है। ऐसे में बिना अंतिम निकासी व्यवस्था के पाइपलाइन बिछाने से भविष्य में गंदे पानी के जमाव और गंदगी फैलने की आशंका बढ़ गई है।

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राज्य सरकार की बजट घोषणा के बाद कस्बे में सीवरेज लाइन बिछाने का कार्य शुरू हो गया है, लेकिन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की जगह अब तक तय नहीं हो सकी है। ऐसे में बिना अंतिम निकासी व्यवस्था के पाइपलाइन बिछाने से भविष्य में गंदे पानी के जमाव और गंदगी फैलने की आशंका बढ़ गई है। बजट वर्ष 2024-25 में कस्बे में 3 एमएलडी क्षमता के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण और 11.300 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने के लिए 25 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए थे।

राशि राजस्थान शहरी पेयजल सीवरेज एवं अवसंरचना निगम लिमिटेड (रुडसीको) को आवंटित की गई। फिलहाल कस्बे में कई स्थानों पर पाइपलाइन डालने का कार्य जारी है, लेकिन ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण की दिशा में अभी तक कोई ठोस प्रगति सामने नहीं आई है। तकनीकी सूत्रों के अनुसार सामान्य प्रक्रिया में पहले ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जाता है और उसके बाद वहीं से पाइपलाइनें निकाली जाती हैं। पोकरण में उल्टा क्रम अपनाया जा रहा है।

प्लांट के लिए दो स्थान चिन्हित किए गए हैं, लेकिन अंतिम चयन नहीं होने के कारण पाइपलाइनें अनुमान के आधार पर बिछाई जा रही हैं। कस्बे में कुल 11.300 किलोमीटर सीवरेज पाइपलाइन बिछाकर उन्हें प्लांट से जोड़ना प्रस्तावित है। साथ ही पूर्व में बिछी लाइनों को भी नए नेटवर्क से जोड़ा जाना है। ट्रीटमेंट प्लांट का कार्य शुरू नहीं होने से पाइपलाइन के अंतिम छोर पर गंदे पानी के जमाव और कीचड़ फैलने का खतरा बढ़ रहा है।

निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर भी उठ रहे सवाल

निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। तकनीकी जानकारी के अनुसार कार्यस्थल पर निर्माण सामग्री और पाइपों की जांच के लिए अस्थायी प्रयोगशाला स्थापित करना आवश्यक है, लेकिन मौके पर ऐसी कोई व्यवस्था नहीं दिखाई दी। पाइपों की हाइड्रो टेस्टिंग भी अभी तक नहीं हुई है। फलसूंड रोड पर पाइपलाइन डाली जा चुकी है और वर्तमान में जोधपुर रोड व तिरुपति नगर कॉलोनी में कार्य चल रहा है।

नगरपालिका स्तर पर भी इस मामले को लेकर चिंता जताई गई है। अधिशासी अधिकारी की ओर से कार्यकारी एजेंसी को पत्र लिखकर प्रगति रिपोर्ट नहीं देने और जांच प्रयोगशाला स्थापित नहीं करने पर आपत्ति दर्ज कराई गई है। निरीक्षण के दौरान पहले प्रयोगशाला स्थापित करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन उनका पालन नहीं हुआ।

सीवरेज लाइन बिछाने के दौरान नगरपालिका और सार्वजनिक निर्माण विभाग की नई सड़कों को भी कई स्थानों पर तोड़ा जा रहा है। अनुमति नहीं लेने से विवाद की स्थिति भी बन रही है और आमजन को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ रही है।

फैक्ट फाइल

  • 25 करोड़ रुपए की स्वीकृति सीवरेज परियोजना के लिए

-3 एमएलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट प्रस्तावित

-11.300 किलोमीटर लंबी सीवरेज पाइपलाइन बिछाने का लक्ष्य

  • 2 स्थान ट्रीटमेंट प्लांट के लिए चिन्हित, अंतिम निर्णय लंबित

नियमों की अनदेखी

पाइपलाइन कार्य में निम्न गुणवत्ता की सामग्री उपयोग में ली जा रही है और नियमों की अनदेखी हो रही है। नई डामर सड़कों को तोड़े जाने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। ट्रीटमेंट प्लांट नहीं होने से भविष्य में कीचड़ और गंदगी फैलने का खतरा भी बढ़ सकता है।

-भूरसिंह राठौड़, स्थानीय निवासी

ट्रीटमेंट प्लांट के लिए दो स्थान चिन्हित

ट्रीटमेंट प्लांट के लिए दो स्थान चिन्हित किए गए हैं और उनमें से एक स्थान का चयन किया जाएगा। पाइपलाइन बिछाने से फिलहाल कोई समस्या नहीं होगी। हाइड्रो टेस्टिंग कार्य पूरा होने के बाद की जाएगी और सामग्री का पूर्व में कई बार निरीक्षण किया गया है।

श्रीकांत जांगिड़, अधिशासी अभियंता, रुडसीको