जैसलमेर

jaisalmer: सत्रह साल के बरकत की मौत से बदली घर की तस्वीर, भाई पर बढ़ा बोझ

जैसलमेर के बासनपीर गांव के 17 वर्षीय बरकत खां की 14 अक्टूबर 2025 को एक दर्दनाक बस अग्निकांड में असमय मौत हो गई। अपने बड़े भाई के साथ मजदूरी कर बुजुर्ग माता-पिता का सहारा बनने वाला बरकत उस दिन जैसलमेर से राशन लेकर घर लौट रहा था। इस दुखद हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियों और भविष्य के सपनों को हमेशा के लिए तोड़कर रख दिया है।
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Updated: 22 Oct 2026, 8:47 PM IST
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बस अग्निकांड में जान गंवाने वाले बरकत खां का घर

जैसलमेर. सत्रह साल की उम्र में जिंदगी की शुरुआत होती है। इस उम्र में सपने आकार लेने लगते हैं और घर-परिवार के बीच भविष्य की छोटी-छोटी योजनाएं बनती हैं। लेकिन बरकत खां के परिवार के लिए 14 अक्टूबर 2025 का दिन ऐसा दुख लेकर आया, जिसने घर की तस्वीर बदल दी। राशन लेने जैसलमेर गया बरकत जब वापस लौट रहा था, तभी बस अग्निकांड में उसकी मौत हो गई।

छोटे भाई के जाने के बाद साजन खां पर परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ीं

बरकत खां पुत्र कोजे खां जैसलमेर से करीब 22 किलोमीटर दूर बासनपीर गांव में रहता था। वह अपने बड़े भाई साजन खां के साथ मजदूरी कर बुजुर्ग माता-पिता की मदद करता था। दोनों भाई मेहनत कर घर की जरूरतें पूरी करने में हाथ बंटाते थे। परिवार के लिए उनकी कमाई और साथ, दोनों अहम थे।

छोटे भाई के जाने से बढ़ी जिम्मेदारी

बरकत की मौत के बाद साजन खां के सामने परिवार की जिम्मेदारियां और बढ़ गईं। जिस छोटे भाई के साथ वह मेहनत करता था, वह अब उसके साथ नहीं है। माता-पिता की मदद करने और घर की जरूरतें पूरी करने की जिम्मेदारी अब और अधिक उसके कंधों पर आ गई है। साजन के लिए भाई को खोने का दु:ख है, वहीं दोनों के बीच साझा मेहनत, घर की जिम्मेदारियां और रोजमर्रा के जीवन से जुड़ा साथ भी खत्म हो गया। परिवार के अनुसार, उस हादसे को भुला पाना संभव नहीं, जिसने एक ही झटके में घर की खुशियां छीन लीं।

बुजुर्ग माता-पिता के लिए गहरा आघात

बुढ़ापे में माता-पिता के लिए संतान का सहारा बहुत मायने रखता है। बरकत और साजन दोनों मजदूरी कर परिवार की मदद करते थे। छोटे बेटे की मौत ने बुजुर्ग माता-पिता को गहरा आघात पहुंचाया और परिवार के भविष्य को लेकर चिंता भी बढ़ा दी।

हादसे से पहले दोनों भाई मिलकर जिम्मेदारियां उठाते थे। अब साजन को अपने छोटे भाई के बिना परिवार संभालना है। रोजमर्रा की जरूरतें अपनी जगह हैं, लेकिन घर में बरकत की अनुपस्थिति हर दिन महसूस होती है।

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22 Oct 2026, 8:47 PM IST
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