जैसलमेर

कुरजां के पहले जत्थे की आवक, तलाश रहे पड़ाव का स्थल

सर्द ऋतु में राजस्थान में मेहमान बनकर आने वाले प्रवासी कुरजां पक्षी की आवक सितंबर माह के पहले ही दिन शुरू हो चुकी है। पहले जत्थे की आवक से पर्यावरण प्रेमी खुश नजर आ रहे हैं।

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Sep 02, 2024

सर्द ऋतु में राजस्थान में मेहमान बनकर आने वाले प्रवासी कुरजां पक्षी की आवक सितंबर माह के पहले ही दिन शुरू हो चुकी है। पहले जत्थे की आवक से पर्यावरण प्रेमी खुश नजर आ रहे हैं। हालांकि अभी तक पश्चिमी राजस्थान में गर्मी का मौसम चल रहा है, लेकिन इस वर्ष अच्छी बारिश से तालाबों, नाडियों में पानी की हुई आवक से यहां आसपास जमीन में नमी बनी हुई है। जिसके चलते कुरजां के पहले जत्थे ने अपना पड़ाव डाल दिया है। गौरतलब है कि मध्य एशिया के चीन, कजाकिस्तान के साथ साइबेरिया, ब्लैक समुंद्र से लेकर मंगोलिया तक फैले प्रदेश से प्रतिवर्ष हजारों कुरजां पश्चिमी राजस्थान में प्रवास करती हैं। हिमालय की ऊंचाइयों को पार करते हुए सितंबर माह में आने वाली कुरजां मार्च माह तक यहां ठहरती है। सरहदी जिले के एक दर्जन से अधिक स्थलों पर कुरजां अपना पड़ाव डालती है। पोकरण क्षेत्र के रामदेवरा, खेतोलाई, चाचा, सोढ़ाकोर के तालाबों, गुड्डी गांव में स्थित रिण, भणियाणा तालाब पर इनका डेरा रहता है। इन कुरजाओं को देखने के लिए कई शोधार्थी भी यहां पहुंचते हैं।

एक सप्ताह तक करेंगे जांच पड़ताल

पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार सर्दी के मौसम की शुरुआत से पूर्व कुरजां के अलग-अलग दल पश्चिमी राजस्थान में पहुंचते हैं। ये दल लगातार एक सप्ताह तक पड़ाव स्थलों के ऊपर उडक़र जांच पड़ताल करते है और उसके बाद अपना डेरा डालते हैं। 1 सितंबर को कुरजां का पहला दल आसमान में नजर आया है, जो तालाबों के आसपास भ्रमण कर जांच पड़ताल कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद यह दल अपना पड़ाव डालेगा। इसके बाद कुरजांओं की आवक शुरू होगी।

कुरजां की विशेषताएं

  • पश्चिमी राजस्थान के मेहमान माने जाने वाले प्रवासी पक्षी कुरजां का वजन दो से ढाई किलो का होता है।
  • कुरजां पानी के आसपास खुले मैदान व समतल जमीन पर ही अपना अस्थायी डेरा डालकर रहते हैं।
  • इन पक्षियों का मुख्य भोजन मोतिया घास होती है। पानी के पास पैदा होने वाले कीड़े मकौड़े खाकर कुरजां अपना पेट भरती है।
  • इस वर्ष अच्छी बारिश से क्षेत्र में मतीरे की फसल होगी। यह भी कुरजां का पसंदीदा भोजन है।फैक्ट फाइल:-
  • 4000 से अधिक कुरजां करती हैं जिले में प्रवास
  • 1 सप्ताह तक दल करते हैं जांच-पड़ताल
  • 6 माह तक रहता है जलस्त्रोतों के समीप पड़ाव
  • 1 दर्जन जलस्त्रोतों के आसपास डालेंगे पड़ाव

कुरजां की आवक हो चुकी शुरू

कुरजां की आवक शुरू हो चुकी है। रविवार को पहला जत्था नजर आया है, जो अभी तक जलस्त्रोतों के आसपास पड़ाव स्थलों की जांच कर रहा है। सितंबर माह के दूसरे पखवाड़े में कुरजां की आवक शुरू हो जाएगी।

  • राधेश्याम पेमाणी, वन्यजीवप्रेमी, धोलिया
Published on:
02 Sept 2024 10:42 pm
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