स्वर्णनगरी के ऐतिहासिक सोनार दुर्ग क्षेत्र में पिछले पर्यटन सीजन के दौरान यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए प्रशासन और पुलिस के साझा प्रयासों ने भरपूर रंग दिखाया और सैलानियों की अपूर्व भीड़ के बावजूद हालात काबू में रहे।
स्वर्णनगरी के ऐतिहासिक सोनार दुर्ग क्षेत्र में पिछले पर्यटन सीजन के दौरान यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए प्रशासन और पुलिस के साझा प्रयासों ने भरपूर रंग दिखाया और सैलानियों की अपूर्व भीड़ के बावजूद हालात काबू में रहे। इस बीच पिछले महीनों नगरपरिषद की ओर से शिव मार्ग से दुर्ग की रिंग रोड व अखे प्रोल तक शुरू की गई गोल्फ कार्ट सेवा का विस्तार अब अखे प्रोल से सोनार दुर्ग तक किए जाने से अव्यवस्था की आशंका है। सोमवार सुबह से दुर्ग जाने और दुर्ग से नीचे उतरने के लिए ये इलेक्ट्रिक कार्ट फेरे लगाते हुए नजर आई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस सेवा को बिना ठोस योजना के संचालित किया गया तो किले की सुधरी हुई यातायात व्यवस्था फिर से अव्यवस्थित हो सकती है।
जानकारी के अनुसार पर्यटकों की सुविधा के नाम पर अखे प्रोल से दुर्ग के दशहरा चौक तक गोल्फ कार्ट चलाने की शुरुआत की गई है। हालांकि पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई इस पहल पर कई वर्गों ने चिंता जताई है। विशेषकर व्यस्त समय के दौरान संकरी और चिकनी घाटियों में गोल्फ कार्ट के आने-जाने से यातायात दबाव बढऩे और दुर्घटनाओं की आशंका जताई जा रही है। दुर्ग क्षेत्र में सुबह 8 से दोपहर 12 से 1 बजे तक पहले ही पैदल पर्यटकों, स्थानीय निवासियों, दुकानदारों और दुपहिया वाहनों की आवाजाही रहती है। ऐसे में गोल्फ कार्ट के संचालन से घाटियों पर भीड़भाड़ बढ़ सकती है। स्थानीय तिपहिया वाहन चालकों में इस बात के लिए रोष है कि वर्षों से वे पर्यटकों को दुर्ग तक पहुंचाने का कार्य कर रहे थे, उन्हें रोका गया लेकिन अब नई गोल्फ कार्ट को आवाजाही करने के लिए प्रशासन ने क्यों मंजूरी दी है ? यही स्थिति पर्यटक गाइडों व इस क्षेत्र के दुकानदारों की भी है। उनका कहना है कि पर्यटक जब सीधे गोल्फ कार्ट में बैठ कर दुर्ग के ऊपर तक पहुंच जाएगा तो उनके रोजगार का क्या होगा? दुर्ग की घाटियां घुमावदार हैं और कार्ट चालक अनुभवी भी नहीं हैं और ये वाहन बिलकुल आवाज नहीं करते तो सामने से आने वाले दुपहिया वाहनों व पैदल राहगीरों से भिड़ंत भी हो सकती है।
दुर्ग के दशहरा चौक में सोमवार को एक साथ कई गोल्फ कार्ट के खड़ा हो जाने से पिछले महीनों से खाली करवाया गया यह क्षेत्र नए सिरे से भर गया। पूर्व में जैसे तिपहिया टैक्सियों के कारण भीड़-भड़क्का रहता था, कुछ वैसे ही हालात सोमवार को नजर आए। ऐसी ही स्थिति दुर्ग के प्रवेश द्वार अखे प्रोल व उसके बाहर की भी दिखाई दी। दुर्ग के जागरुक निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि गोल्फ कार्ट संचालन के लिए स्पष्ट नियम, समय-सीमा और मार्ग तय किए जाएं, ताकि दुर्ग क्षेत्र की यातायात व्यवस्था और पर्यटकों की सुरक्षा प्रभावित न हो। दूसरी ओर गोल्फ कार्ट के किराये को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पूर्व में नगरपरिषद प्रशासन की ओर से कहा गया था कि प्रति सवारी आवाजाही के 30 रुपए लिए जाएंगे, जबकि लोगों का आरोप है कि एक तरफा किराया ही 30 रुपए वसूला जा रहा है।
सोनारकिले के ही होटल व्यवसायियों ने पर्यटकों की सुविधा के लिए गोल्फ कार्ट का संचालन दुर्ग से शुरू करवाने की मांग की थी, जिस पर इस सेवा का विस्तार किया गया है। इसमें आने और जाने का किराया प्रति व्यक्ति 30 रुपए है, संबंधित व्यक्ति को टिकट संभाल कर रखना होगा।