-क्रिसमस से अब तक 30 हजार सैलानियों की आवक-वर्ष के अंतिम दिन आएंगे 10 हजार और सैलानी लाएंगे 2 करोड़
जैसलमेर. सरहदी जैसलमेर में दिसंबर के महीने में हिन्दुस्तान के कोने-कोने से सैलानी उमड़ रहे हैं। देशी सैलानियों के हुजूम उमडऩे के कारण विदेशी पर्यटकों की कमी महसूस नहीं हो रही है। जैसलमेर में पर्यटन को परवान चढ़ाने में मुख्यालय से 42 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सम सेंडड्यून्स का सबसे अहम किरदार बनकर उभर रहा है। मखमली रेत के समंदर में पहुंचकर सैलानी चाहे वे देशी हों या विदेशी खो जाते हैं। जानकारों की मानें तो जैसलमेर में गत छह दिन में 13 करोड़ रुपए पर्यटन उद्योग की झोली में गए हैं। क्रिसमस से अब तक 30 हजार सैलानियों की आवक हो चुकी है और वर्ष के अंतिम दिन यानी गुरुवार को 10 हजार और सैलानी और आएंगे। इस तरह 2 करोड़ रूपए जैसाण को और मिलेंगे। जैसलमेर के सोनार दुर्ग, गड़ीसर तालाब, पटवों की हवेली के साथ-साथ जिला मुख्यालय से करीब 44 किलोमीटर दूर सम के धोरों पर ऊंट की सवारी करने से लेकर सूर्यास्त के मनोरम नजारों को आंखों व कैमरों में कैद करने की सबकी चाहत होती है। सैलानी वहां अब केवल कुछ घंटे गुजार कर ही संतुष्ट नहीं हो पाते, इसलिए अब इन धोरों के बीच या इनके आसपास रात गुजारने की उनकी इच्छा अधिक रहती है। उनकी इसी चाहत का यह परिणाम है कि मौजूदा समय में सेंड ड्यून्स से करीब बीस किलोमीटर पहले से रिसोट्र्स व कैम्प स्थापित हो चुके हैं। सम के धोरों के इर्द.गिर्द तो अब भरा-पूरा शहर ही मानो बस गया है। पूरा वातावरण रोशनियों से नहाया हुआ नजर आता है। पिछले कुछ सालों के दौरान यहां सालाना तीन सौ करोड़ से ज्यादा का व्यापार रिसोट्र्सए कैम्पस और अन्य पर्यटन गतिविधियों के जरिए होने लगा है। रिसोट्र्स की तादाद हर वर्ष बढ़ती है। दस हजार से ज्यादा लोगों को धोरों पर पर्यटन से रोजगार मिला हुआ है।
बड़ा ब्रांड बन गया सम
दो दशकों के दौरान तेजी से फैले जैसलमेर पर्यटन के बाजार में सम कोहिनूर हीरा बनकर चमक बिखेर रहा है। मौजूदा पर्यटन में सम की भागीदारी जैसलमेर शहर से किसी भी कोण से कमतर नहीं रह गई है। जो सैलानी एक रात के ठहराव के लिए आता है तो वह सम को प्राथमिकता देता है। दो रात का समय होने पर ही वह एक रात जैसलमेर की होटलों में गुजारता है। पर्यटन संबंधी ट्रेड फेयर्स में जैसलमेर के पर्यटन व्यवसायी सम को ब्रांड बनाया जाता है। देश-दुनिया के सैलानी जैसलमेर आते हैं। बॉलीवुड और क्षेत्रीय भाषाओं के फिल्मकार भी फिल्मों के अलावा विभिन्न एड कैम्पेन आदि को सम के सोनलिया रेत के धोरों में फिल्माना पसंद करने लगे हैं। निवेशक भी सम में रिसोट्र्स तथा कैम्प स्थापित करने के साथ सम मार्ग पर होटल आदि बनाने को मुफीद मान रहे हैं।
रोज बनता है मेले का माहौल
सम के धोरों पर इन दिनों शाम के समय जहां तक नजर जाती है, पर्यटकों के रैले नजर आते हैं। कई बार सुबह जैसलमेर शहर में जितने सैलानी सड़कों पर नजर नहीं आते, उससे ज्यादा शाम के समय सेंड ड्यून्स पर बिखरे दिखाई देते हैं। यही कारण है कि शहर के होटलों में कमरे भले ही मिल जाए लेकिन सीजन के चरम पर पहुंचने के दौरान सम के रिसोट्र्स और कैम्प्स में हाऊस फुल के टैग लगे नजर आते हैं। धोरों पर वर्तमान मौसम में सायं 4 बजे से चहल-पहल शुरू होती हैए जो सूर्यास्त के समय तक परवान चढ़ जाती है। सम में रिसोट्र्स की संख्या 100 से ज्यादा तक हो गई है। इसके अलावा कुछ होटल्स व अन्य ठहरने के ठिकाने भी हैं। जहां करीब साढ़े तीन हजार टैंट और कॉटेज मेहमानों की खातिरदारी के लिए सुलभ हैं।
सम का खास आकर्षण
-जहां तक नजर जाए सर्पिलाकार धोरे सैलानियों का मन मोह लेते हैं।
-सम सेंड ड्यून्स के लिए जैसलमेर से दोहरा सड़क मार्ग है।
-सम में रोजाना शाम को राजस्थानी मरुसंगीत की महफिल रिसोट्र्स में जमती है।
-यहां राजस्थानी व्यंजनों का जायका भी उपलब्ध करवाया जाता है।
-ऊंट की पीठ पर बैठकर धोरों का भ्रमण करना सैलानियों को खूब रास आता है।
-फिल्मों में ये धोरे बेहद खूबसूरती से दर्शाये गए हैं।
फैक्ट फाइल
-300 करोड़ से ज्यादा व्यवसाय सम में
-06 लाख सैलानी सालाना पहुंचते हैं सम
-100 से ज्यादा रिसोट्र्स सम सेंड ड्यून्स पर