जैसलमेर

ईदमिलादुन्नबी पर जलसों का हुआ आयोजन

- दूसरे वर्ष भी नहीं निकला जुलूस

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Oct 31, 2020
ईदमिलादुन्नबी पर जलसों का हुआ आयोजन

पोकरण. हजरत पैगंबर मोहम्मद सल्लल्लाहु अलेही वसलम की पैदाइश व इंतकाल का दिवस ईदमिलादुन्नबी शुक्रवार को श्रद्धा व अकीदत के साथ मनाया गया। इस मौके पर मदरसा अहले सुन्नत दारूल उलूम मोइनुल इस्लाम व विभिन्न मस्जिदों में पैगंबर मोहम्मद को याद करते हुए उनके बताए मार्गों पर चलकर आम आवाम की खिदमत करने का संकल्प लिया गया। ईद मिलादुन्नबी के मौके पर कस्बे के जोधपुर रोड स्थित मदरसा अहले सुन्नत दारूल उलूम मोइनुल इस्लाम में सुबह 10 बजे आयोजित समारोह में दारूल उलूम इशाकिया जोधपुर के मौलाना मेहरुदीन की रहनुमाई में मदरसे के सदर मौलाना हुसैन, मौलाना हकीम, मौलाना हनीफ भैया ने ध्वजारोहण किया।
इंसानियत की खिदमत कर मुल्क की तरक्की के लिए करें कार्य
इस मौके पर मदरसे में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए इशाकिया मदरसा जोधपुर के मौलाना मेहरुदीन ने संबोधित करते हुए कहा कि सबसे बड़ा मजहब इंसानियत का है। उन्होंने हजरत पैगंबर मोहम्मद साहब के जीवन पर प्रकाश डालते हुए प्रेरणा लेने व उनके बताए इंसानियत के मार्ग पर चलकर आम आवाम, जरुरतमंद की खिदमत करने की बात कही। उन्होंने कहा कि इंसानियत की खिदमत करना ही मोहम्मद साहब व इस्लाम का पैगाम है। उन्होंने अल्पसंख्यक समाज में तालिम की कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए अपनी औलादों को दीनी व दुनियाई तालिम दिलाने व मुल्क की तरक्की के लिए कार्य करने का आह्वान किया। मौलाना अब्दुल सत्तार ने आपसी भाईचारे, सद्भाव, मुल्क में अमन, चैन की मजबूती के लिए दुआ की।
नहीं निकाला जुलूस
ईदमिलादुन्नबी के मौके पर मदरसे के तलबाओंं की ओर से प्रतिवर्ष जुलूस का आयोजन किया जाता है, जो कस्बे के मुख्य मार्गों से होते हुए भवानीप्रोल स्थित तेलियों की मस्जिद तक जाता है। गत वर्ष अयोध्या में राम मंदिर व बाबरी मस्जिद को लेकर सर्वोच्च न्यायालय की ओर से फैसला सुनाए जाने के बाद जुलूस नहीं निकाला गया। इसी प्रकार इस वर्ष कोरोना संक्रमण की महामारी के कारण जुलूस नहीं निकालने का निर्णय लिया गया।
यहां भी नहीं हुआ कार्यक्रम
लाठी. ईदमिलादुन्नबी का पर्व इस वर्ष कोरोना संक्रमण की महामारी के कारण घरों में ही मनाया गया तथा कोई सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं किया गया। पैगंबर मोहम्मद के जन्मदिन व इंतकाल के दिवस पर श्रद्धा व अकीदत के साथ बारावफात के मौके पर सरकार की ओर से जारी की गई गाइडलाइन की पालना की गई। प्रतिवर्ष यहां जुलूस निकाला जाता है, लेकिन इस वर्ष कोई जुलूस नहीं निकाला गया। मुस्लिम समाज के लोगों ने घरों में ही दुआ की। समाजसेवी मोयबखां ने बताया कि प्रतिवर्ष जुलूस निकालकर बारावफात का पर्व मनाया जाता है, लेकिन कोरोना संक्रमण की महामारी के कारण इस वर्ष कोई कार्यक्रम नहीं किया गया।

Published on:
31 Oct 2020 01:56 pm
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