जैसलमेर

हीटवेव की मार में झुग्गियां झुलसीं, संसाधनों बिना जिंदगी होती गई कठिन

शहर की कई बस्तियों में बिजली कटौती और पानी की अनियमित आपूर्ति ने हालात और कठिन बना दिए हैं। दोपहर के समय लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं, जबकि मजदूरी करने वाले परिवारों की आय पर भी असर पड़ा है।

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May 08, 2026

भीषण हीटवेव का सबसे ज्यादा असर शहर और आसपास की झुग्गी बस्तियों में रहने वाले कमजोर तबकों पर दिखाई दे रहा है। तापमान 44 डिग्री के पार पहुंचने के बाद टीनशेड और कच्चे मकानों में दिन भर गर्मी भ_ी जैसी महसूस हो रही है। सीमित संसाधनों के कारण बड़ी संख्या में परिवार कूलर, पंखे और पर्याप्त पेयजल जैसी मूल सुविधाओं से दूर हैं। गर्म हवाओं और उमस के बीच बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों की हालत लगातार बिगड़ रही है।

शहर की कई बस्तियों में बिजली कटौती और पानी की अनियमित आपूर्ति ने हालात और कठिन बना दिए हैं। दोपहर के समय लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं, जबकि मजदूरी करने वाले परिवारों की आय पर भी असर पड़ा है। स्थानीय चिकित्सकों के अनुसार पिछले दिनों गर्मीजनित थकान, डिहाइड्रेशन और चक्कर आने की शिकायतों में बढ़ोतरी दर्ज हुई है। सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवी समूहों ने प्रशासन से राहत शिविर बढ़ाने, सार्वजनिक स्थानों पर ठंडे पानी की व्यवस्था करने और जरूरतमंद परिवारों तक चिकित्सा सहायता पहुंचाने की मांग उठाई है। कई स्थानों पर निजी स्तर पर पानी वितरण और छाछ सेवा शुरू की गई है, लेकिन बढ़ती गर्मी के मुकाबले यह प्रयास अभी अपर्याप्त माने जा रहे हैं।

फैक्ट फाइल

-अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के आसपास

-प्रभावित क्षेत्र - झुग्गी बस्तियां और मजदूर बहुल इलाके

-प्रमुख समस्याएं- पानी संकट, बिजली कटौती, कूलिंग संसाधनों का अभाव

-ज्यादा प्रभावित- बच्चे, बुजुर्ग और दिहाड़ी मजदूर

-बढ़ती शिकायतें- डिहाइड्रेशन, थकान, चक्कर, कमजोरी

एक्सपर्ट व्यू: गर्मी अब स्वास्थ्य आपदा जैसी स्थिति बना रही

वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. संजय व्यास ने बताया कि लगातार बढ़ता तापमान कमजोर तबकों के लिए खतरा है। टीनशेड और कच्चे घरों में तापमान सामान्य से कई डिग्री अधिक महसूस होता है, जिससे शरीर जल्दी डिहाइड्रेट होता है। छोटे बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा संवेदनशील रहते हैं। पर्याप्त पानी, ओआरएस, छायादार स्थान और नियमित बिजली उपलब्ध नहीं होने पर स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है। दोपहर में अनावश्यक बाहर निकलने से बचना जरूरी है। प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं को मिलकर राहत केंद्र, पानी वितरण और प्राथमिक स्वास्थ्य सहायता की व्यवस्था बढ़ानी चाहिए।

स्वर्णनगरी में लू के थपेड़ों ने झुलसाया

सीमावर्ती जिले में गर्मी का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को भी दोपहर में चली लू ने लोगों को झुलसा-सा दिया। दुपहिया वाहन चालकों को तो ऐसा महसूस हुआ मानो अंगारे आकर उनसे टकरा रहे हैं। फलोदी और बाड़मेर के बाद जैसलमेर प्रदेश का तीसरा सबसे गर्म शहर रहा। मौसम विभाग के अनुसार दिन का अधिकतम तापमान 44.0 व न्यूनतम 25.9 डिग्री से. रिकॉर्ड किया गया। यह एक दिन पहले गुरुवार को क्रमश: 45.1 व 27.0 डिग्री रहा था। शुक्रवार को सुबह 9 बजे से धूप की किरणों ने तपिश का अहसास करवाना शुरू कर दिया। दोपहर होते-होते तो धूप असहनीय हो गई और सडक़ों पर निकलना मुश्किल हो गया। इस दौरान घरों से बाहर निकले लोगों ने चेहरे व सिर सहित पूरे शरीर को ढंकने में ही भलाई समझी।

Published on:
08 May 2026 09:03 pm
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