
हमला तो भारत को करना था...
लोंगेवाला की जीत के नायक कुलदीप सिंह चांदपुरी ने कहा कि, 1971 में भारतीय सेना को पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश कर हमला करना था, लेकिन उससे पहले पाकिस्तान ने लोंगेवाला में हमला बोल दिया। पहले पहल सेना के उच्चाधिकारियों को तो यकीन ही नहीं हुआ कि, पाकिस्तान के टैंक लोंगेवाला पोस्ट की तरफ बढ़ रहे हैं। चांदपुरी ने इस विजय के लिए उन्हें नायक बताए जाने पर कहा कि, यह विजय उनके साथियों के मजबूत इरादों तथा मौत को प्रत्यक्ष देखकर भी उच्चतम वीरता का परिचय दिए जाने से मिली। इसमें भारतीय वायुसेना का भी अहम योगदान रहा। जिसने 6 दिसम्बर की सुबह लोंगेवाला में हंटर विमानों से सटीक निशाने लगाकर दुश्मन के टैंकों की कब्रगाह बना दी। चांदपुरी ने कहा कि भारतीय सेना उस जमाने से आज कहीं अधिक सक्षम और प्रशिक्षित है। उन्हें विश्वास है कि युद्ध का मैदान फिर सजता है तो हमारे जवान अपनी पूर्व पीढ़ी से भी आगे बढकऱ देश के लिए वीरता का प्रदर्शन करेंगे।
योद्धाओं का किया सम्मान
सेना की बैटल एक्स डिविजन ने ऐतिहासिक विजय की याद में मंगलवार को मनाए गए लोंगेवाला दिवस पर मेजर जनरल ओपी गुलिया ने कम्पनी कमांडर ब्रिगेडियर (उस समयवीर मेजर) महाचक्र विजेता कुलदीपसिंह चांदपुरी समेत भारतीय वायु सेना तथा सीमा सुरक्षा बल के 21 सेवानिवृत्त योद्धाओं का सम्मान किया। उल्लेखनीय है कि 5 व 6 दिसम्बर 1971 की रात को पाकिस्तान की 51 इंफेन्ट्री ब्रिगेड ने टी-58 रेजीमेंट तथा शेरमन टैंक स्क्वाड्रन के साथ मिलकर लोंगेवाला तथा रामगढ़ पर कब्जा करने के उद्देश्य से हमला किया था। मेजर कुलदीपसिंह चांदपुरी के नेतृत्व में 23 पंजाब की एक कम्पनी ने बड़ी दृढ़ता से पूरी रात उन्हें रोक रखा। सुबह भारतीय वायुसेना के हवाई हमलों ने दुश्मन के टैंकों को ध्वस्त कर दिया। गौरतलब है कि इस विजय के समारोह की शुरुआत 30 नवम्बर से आरम्भ हुई। जिसके तहत इंडिया गेट, दिल्ली से लोंगेवाला साइकिल रैली से हुई। मंगलवार को लोंगेवाला में आयोजित कार्यक्रम के में लोंगेवाला के योद्धाओं के नाम से जैसलमेर मिलिट्री स्टेशन में सडक़ों का नामकरण करने की घोषणा मेजर जनरल ओपी गुलिया ने की। समारोह में कर्नल (उस समय लेफ्टीनेंट) धर्मवीरसिंह, वीर चक्र और शौर्य चक्र विजेता कर्नल जीएस बाज्वा व अन्य योद्धाओं को भी सम्मानित किया गया।