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पोकरण में नकली मावे की खेप पहुंचने का दावा, जांच की दरकार

पोकरण और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में दीपावली से पहले बाहर से आ रहे संदिग्ध मावे की खेप से मिलावट का बड़ा खतरा मंडराने लगा है। तड़के और देर रात बसों व निजी वाहनों के जरिए हो रही इस आपूर्ति के बावजूद खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा परिवहन के दौरान प्रभावी जांच न होने से स्थानीय लोगों की सेहत पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। त्योहार पर मिठाइयों की बढ़ती मांग के बीच प्रशासन की इस सुस्ती से मिलावटखोरों के हौसले बुलंद होते नजर आ रहे हैं।
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जैसलमेर

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Deepak Vyas

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Updated: 5 Nov 2026, 9:03 PM IST

pokaran jaisalmer news

जैसलमेर. मिठाइयों की बढ़ती मांग के बीच बाजार में मावे की आवक ने बढ़ाई चिंता।

पोकरण. दीपावली की मिठास में मिलावट का खतरा घुलने की आशंका है। आरोप है कि पोकरण कस्बे और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिदिन मावे की खेप पहुंच रही है। बसों और निजी वाहनों से होने वाली इस आपूर्ति का समय देर रात और तड़के बताया जा रहा है। जानकारों के अनुसार आगामी 8 नवंबर को दीपावली पर मिठाइयों की मांग बढ़ने के साथ मावे की खपत भी बढ़ेगी। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के अनुसार वाहनों में जांच के लिए टीम को अनुमति नहीं है। पत्रिका पड़ताल में सामने आया कि बसों और अन्य वाहनों के जरिए मावा पोकरण कस्बे तथा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचाया जा रहा है। स्थानीय मिठाई विक्रेताओं तक इसकी आपूर्ति होने की जानकारी सामने आ रही है। ऐसे में बाहर से आने वाले मावे की गुणवत्ता और उसकी आपूर्ति व्यवस्था की जांच जरूरी हो जाती है। इसके बावजूद परिवहन के दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से जांच और निगरानी की प्रभावी व्यवस्था सामने नहीं आई है।

देर रात और तड़के होती है आपूर्ति

पड़ताल में सामने आया कि मावे की खेप बसों, लोक परिवहन और निजी वाहनों से भेजी जाती है। इसके लिए देर रात और तड़के का समय चुने जाने की जानकारी मिली है। वाहनों में टिन और डिब्बों के रूप में मावा पहुंचता है। थोक विक्रेता मिठाई की दुकानों के संचालकों से संपर्क कर इसकी आपूर्ति करते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में मावे की गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर होती है, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। परिवहन के दौरान जांच नहीं होने की स्थिति में दुकानों तक पहुंचने वाली खेप की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी खाद्य सुरक्षा विभाग पर और बढ़ जाती है।

कीमत में अंतर से बढ़ता है मिलावट का मुनाफा

दीपावली और होली जैसे पर्वों पर मावे से तैयार मिठाइयों की मांग तेजी से बढ़ती है। स्थानीय बाजार में शुद्ध मावे की कीमत 300 से 350 रुपए प्रति किलो बताई जा रही है, जबकि सिंथेटिक और नकली मावा 100 से 150 रुपए प्रति किलो तक उपलब्ध होने की जानकारी है। कीमत में इतना बड़ा अंतर अधिक मुनाफे के लालच में मिलावट की आशंका बढ़ाता है। हालांकि, केवल कीमत के आधार पर किसी मावे को नकली नहीं कहा जा सकता। उसकी गुणवत्ता की पुष्टि खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप प्रयोगशाला जांच से ही संभव है।

ऐसे करें मिलावट की शुरुआती पहचान

मावे में स्टार्च की मिलावट का संकेत जानने के लिए टिंचर आयोडीन की कुछ बूंदें डाली जाती हैं। रंग नीला या बैंगनी होने पर स्टार्च की मौजूदगी का संदेह हो सकता है।

हथेली पर मावा मसलने से उसकी बनावट और चिकनाई का सामान्य अंदाजा लगाया जा सकता है। हालांकि, यह शुद्धता का प्रमाण नहीं है।

स्वाद, रंग, गंध और बनावट में असामान्यता मिलावट का संदेह पैदा कर सकती है। अंतिम पुष्टि प्रयोगशाला जांच से ही होती है।

मिलावटी मावे से बिगड़ सकती है सेहत

सिंथेटिक और दूषित मावे से तैयार मिठाइयों का सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे खाद्य पदार्थों से पेट दर्द, उल्टी, दस्त और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। मिलावट में इस्तेमाल पदार्थों की प्रकृति और मात्रा के अनुसार स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए दूषित खाद्य पदार्थ विशेष रूप से जोखिम पैदा कर सकते हैं।

- डॉ. अजयपाल सिंह भाटी, चिकित्साधिकारी, राजकीय जिला चिकित्सालय, पोकरण

अभियान चलाकर कर रहे कार्रवाई

दीपावली के त्योहार को देखते हुए जिलेभर में खाद्य एवं पेय पदार्थों की जांच के लिए अभियान चलाया जा रहा है। दुकानों से नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भिजवाए जा रहे हैं। वाहनों में जांच के लिए टीम को अनुमति नहीं है। दुकानों में कहीं मावा बिकता हुआ मिलता है तो कार्रवाई की जाएगी।

- डॉ. एमडी सोनी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जैसलमेर