थार मरुस्थल में भारतीय सेना ने दुश्मन के आकाशीय हमलों को पल भर में नाकाम करने की अपनी क्षमता का परिचय दिया है। कोणार्क कॉर्प्स की ओर से किए गए युद्धाभ्यास में स्ट्रेला -10 डिफेंस सिस्टम ने सटीक ढंग से दुश्मन की ओर से भेजे गए लड़ाकू विमानों और ड्रोन को हवा में ही नष्ट करने का पराक्रम दिखा कर जता दिया कि हमारी सीमा में परिंदा भी हमसे पूछे बगैर पर नहीं मार सकता।
थार मरुस्थल में भारतीय सेना ने दुश्मन के आकाशीय हमलों को पल भर में नाकाम करने की अपनी क्षमता का परिचय दिया है। कोणार्क कॉर्प्स की ओर से किए गए युद्धाभ्यास में स्ट्रेला -10 डिफेंस सिस्टम ने सटीक ढंग से दुश्मन की ओर से भेजे गए लड़ाकू विमानों और ड्रोन को हवा में ही नष्ट करने का पराक्रम दिखा कर जता दिया कि हमारी सीमा में परिंदा भी हमसे पूछे बगैर पर नहीं मार सकता।
स्ट्रेला-10 एयर डिफेंस सिस्टम, विमान और ड्रोन के इंजन से निकलने वाली गर्मी को लक्षित करता है और उसका पीछा कर उसे नष्ट कर दिया। कोणार्क कॉर्प्स के डेजर्ट वॉरियर्स ने स्टे्रला-10 मिसाइल सिस्टम के साथ युद्धाभ्यास किया। बताया जाता है कि इस युद्धाभ्यास का मुख्य उद्देश्य कम ऊंचाई पर उडऩे वाले दुश्मन के खतरों को पलभर में नष्ट करने की क्षमता को जांचना था।
जानकारी के अनुसार स्ट्रेला-10 की सबसे बड़ी खूबी इसका इन्फ्रारेड सीकर है। इससे निकलने वाली मिसाइल दुश्मन के विमान या ड्रोन के इंजन से निकलने वाली गर्मी को पहचान लेती है। इसके बाद उसे टारगेट पर ले लेती है और फिर हवा में ही उसका पीछा करते हुए उड़ा देती है। अभ्यास के दौरान सटीकता और धैर्य का प्रदर्शन करते हुए सैनिकों ने सीधे टारगेट पर निशाना लगाया। स्ट्रेला-10 एक शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम है।
कहा जाता है कि यह एक चलता-फिरता किला है, जो दुश्मन के लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टर और आज के दौर के सबसे बड़े खतरे सुसाइड ड्रोन को आसमान में ही खत्म करने के लिए बनाया गया है। यह सिस्टम एक चैन वाले बख्तरबंद वाहन पर सवार होता है, जो उबड़-खाबड़ रास्तों और रेत के टीलों पर भी पक्की सडक़ जितनी तेजी से दौड़ता है। खुले सीमा क्षेत्र में जहां दुश्मन के ड्रोन या छोटे विमान कम ऊंचाई पर उडकऱ घुसपैठ की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे में स्ट्रेला-10 डिफेंस सिस्टम जैसे मोबाइल सिस्टम सेना की पहली रक्षा पंक्ति बनते हैं।