जैसलमेर

बादशाह-शहजादा की परंपरा जैसाण की होली को बनाती है खास

-ऐतिहासिक सोनार दुर्ग में सजता है बादशाह का दरबार-उत्साह व उल्लास के माहौल में निकलती है बादशाह-शहजादे की सवारी

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Mar 28, 2021
बादशाह-शहजादा की परंपरा जैसाण की होली को बनाती है खास

जैसलमेर. सरहद के पास बसे खूबसूरत शहर जैसलमेर में जब ऐतिहासिक सोनार दुर्ग में होली के दिन माहौल के बीच बदशाही बरकरार, शहजादा सलामत... के जयकारे गूंजते हैं तो यह लगने लगता है कि बादशाह व शहजादे की की सवारी आ रही है। सोनार दुर्ग में धुलंडी के दिन बादशाह और शहजादा का स्वांग होता है। यह परंपरा वर्षों से आज भी कायम है। इस पंरपरा में एक बादशाह बनाया जाता है। इसी तरह शहजादों के स्वांग के लिए बालकों को तैयार कर बिठाया जाता है।

एक दिन के बादशाह बनने का गौरव पुष्करणा समाज के व्यास जाति के विवाहित व्यक्ति को ही मिलता है। जैसलमेर में होली की यह परंपरा, अन्य स्थानों की होली से कुछ अलग बनाती है। वर्षों से इस परंपरा का निर्वहन आज भी किया जाता है। होली के मस्तीमय व उल्लास से परिपूर्ण माहौल में गुलाल, अबीर उड़ाते और होली के उन्माद में मचलते व तबले की थाप पर थिरकते बच्चे, युवा और बुजुर्ग बादशाह के दरबार में शामिल होते हैं और उसके बाद निकाली जाने वाली सवारी में भी फाग गीत गाते हुए साथ चलते हैं। यह नजारा देखने दूर-दराज से लोग आते हैं।

बादशाह क्या फरमाता है...
बुजुर्ग बताते हैं कि वर्षों पहले हुई बादशाह-शहजादा की प्रथा के पीछे, वैसे तो कई कहानियां प्रचलित है। जो कहानी ज्यादा प्रचलित है वह यह है कि जैसलमेर से दूर किसी बाहरी क्षेत्र से एक व्यास जाति का ब्राह्मण अपने धर्म परिवर्तन के भय से भाग कर जैसलमेर आया था। उस दिन होली का अवसर था। जैसलमेर आकर जब उसने अपनी पीड़ा यहां के लोगों को बताई तो उन्होंने होली पर्व के स्वांग के तौर पर उसे बादशाह का स्वांग कर तख्त पर बिठा दिया। जब ब्राह्मण को खोजने संबंधित क्षेत्र के बादशाह के लोग यहां आए तो वे खुश हो गए कि ब्राह्मण का धर्म परिवर्तन हो गया है, जबकि यह होली का स्वांग था।

उसके बाद वे यहां से खुश होकर लौट गए। इसके बाद से यहां बादशाही बरकरार, शहजादा सलामत...की परंपरा का निर्वहन किया जाता है। सोनार दुर्ग स्थित नगर आराध्य देव लक्ष्मीनाथ मंदिर पहुंचकर जब बादशाह से पूछा जाता है कि बादशाह क्या फरमाता है तो बादशाह बना व्यक्ति अपनी श्रद्धानुसार राशि या फिर गोठ की घोषणा करता है। जिस घर का सदस्य बादशाह या शहजादा बनता है, उनके यहां बधाइयोंं का तांता लग जाता है। इस मौके पर सैकड़ों कैमरे की नजर इस अनूठी प्रथा पर रहती है। इस तरह की होली को देखने सात-समंदर पार से भी सैलानी आते हैं।

Updated on:
29 Mar 2021 09:21 am
Published on:
28 Mar 2021 10:15 pm
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