बड्डा में पानी की समस्याएं बड़ी -डेढ़ दशक से पेयजल समस्या से जूझ रहे ग्रामीण
महंगे दामों में टैंकर मंगवाना बनी हुई है मजबूरी
रामगढ़ (जैसलमेर). नहरी ग्राम पंचायत तेजपाला के बड्डा गांव में गत 15 वर्षों से पेयजल आपूर्ति की समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार यहां जीएलआर रख-रखाव के अभाव में क्षतिग्रस्त हो रही है। पहली बार 1985 में जीएलआर व दूसरी 2003 में दोनों क्षतिग्रस्त हो चुकी है। ऐसे में लम्बे समय से यहां पेयजल की समस्या बनी हुई है। ग्रामीण नहर के 112 आरडी माइनर से पीने व पशुओं के लाते थे। अब नहर में क्लोजर समय से पेयजल की समस्या हो रही है। ग्रामीण बताते हैं कि इस संबंध में जिम्मेदारों को अवगत कराने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। मजबूरीवश ग्रामीणों को नहर की 105 आरडी से टैंको से पानी मंगाना पड़ता है, जिसके लिए 500 रुपए खर्च करने पड़ रहेे हैं। ग्रामीण रघुनाथ सिंह, उप सरपंच जामूकंवर बताते हैं कि भीषण गर्मी में जहां पानी की खपत बढ़ी है, वहीं पेयजल समस्या में भी इजाफा हुआ है।
एक माह से जलापूर्ति बंद, ग्रामीण व मवेशी परेशान
पोकरण(जैसलमेर). ग्राम पंचायत डिडाणिया क्षेत्र में स्थित सुखजी की ढाणी में गत एक माह से जलापूर्ति बंद होने के कारण ग्रामीणों व मवेशी को परेशानी हो रही है। गौरतलब है कि गांव में जलदाय विभाग की ओर से वर्षों पूर्व एक जीएलआर व पशुखेली का निर्माण करवाकर पाइपलाइन से जोड़ा गया था, लेकिन गत एक माह से जीएलआर व पशुखेली में जलापूर्ति बंद पड़ी है। ग्रामीणों के अनुसार भीषण गर्मी में जलापूर्ति नहीं होने के कारण मवेशी के बुरे हाल हो रहे है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण लवां व धूड़सर आदि गांवों से 8 00 से एक हजार रुपए प्रति ट्रैक्टर टंकी पानी खरीदकर अपना काम चला लेते है, लेकिन उनके लिए पशुओं को पानी खरीदकर पिलाना मुश्किल हो रहा है। गांव सहित आसपास क्षेत्र में बड़ी संख्या में आवारा पशुधन है, जो गांव की पशुखेली में पानी पीने के लिए आते है, लेकिन पशुखेली व गांव की नाडियों मेंभी पानी नहीं होने की स्थिति में प्यास के मारे जंगलों में दम तोड़ रहे है।
टैंकर शुरू करने की मांग
ग्रामीणों ने बुधवार को उपखण्ड अधिकारी को एक ज्ञापन सुपुर्द कर गांव में व्याप्त पेयजल संकट की जानकारी दी। उन्होंने ज्ञापन में बताया कि गत एक माह से गांव में जलापूर्ति बंद है। जलदाय विभाग की ओर से जीएलआरों व पशुखेलियों में जलापूर्ति नहीं होने की स्थिति में टैंकरों से जलापूर्ति करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन गत एक माह में एक भी टैंकर गांव में नहीं पहुंचा है। उन्होंने पशुओं की हालत को देखते हुए पशुखेली में ही टैंकरों से जलापूर्ति करने की मांग की है।