फलसूंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत पारासर के खुमसिंह की ढाणी में जल संकट लगातार गहराता जा रहा है। पिछले कई वर्षों से यहां जलापूर्ति पूरी तरह ठप पड़ी है।
फलसूंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत पारासर के खुमसिंह की ढाणी में जल संकट लगातार गहराता जा रहा है। पिछले कई वर्षों से यहां जलापूर्ति पूरी तरह ठप पड़ी है। लंबे समय से यहां नलों में पानी की एक बूंद तक नहीं आई है। ढाणी के करीब 150 परिवार भीषण गर्मी में गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं। ग्रामीणों को अपनी दैनिक जरूरतों और पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था निजी टैंकरों से करनी पड़ रही है।
फलसूंड से एक टैंकर मंगवाने पर 700 से 1000 रुपए तक खर्च करना पड़ता है, जिससे गरीब परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।ग्रामीणों के अनुसार पानी पर हर महीने हजारों रुपए खर्च हो रहे हैं, जो उनकी आर्थिक स्थिति को कमजोर कर रहा है। तपते रेगिस्तान में पानी की कमी के कारण मानव जीवन के साथ पशुधन भी प्रभावित हो रहा है।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्रीष्मकालीन राहत के नाम पर लगाए गए पानी के टैंकर केवल कागजों में ही संचालित हो रहे हैं। धरातल पर न तो पशु खेलियों में पानी पहुंच रहा है और न ही ढाणी के लोगों को राहत मिल रही है।
भीषण गर्मी के मौसम में प्राकृतिक जलस्त्रोतों के सूखने पर जगदंबा सेवा समिति ट्रस्ट की ओर से वन्यजीव व पशु बाहुल्य भादरिया ओरण में खेलियों का निर्माण करवाया गया है। यहां टैंकरों से पानी भरवाया जा रहा है। जगदंबा सेवा समिति ट्रस्ट के गोरक्षक गोपालसिंह भाटी ने बताया कि ट्रस्ट के सचिव जुगलकिशोर आसेरा के निर्देश पर प्रतिवर्ष भादरिया ओरण में अलग-अलग स्थानों पर पशुखेलियों का निर्माण करवाया जाता है।
साथ ही उनमें पानी की व्यवस्था की जाती है, ताकि गर्मी के मौसम में वन्यजीवों व पशुओं को परेशानी नहीं हो। उन्होंने बताया कि कई बार भीषण गर्मी में पानी की तलाश में भटकते वन्यजीव व पशु जान गंवा देते है। इसी को लेकर ट्रस्ट की ओर से पशुखेलियां तैयार करवाकर ओरण में रखवाई जा रही है। गोरक्षकजितेन्द्रसिंह राठौड़ व अशोकसिंह भाटी ने बताया कि एक वर्ष में सैकड़ों वन्यजीव पानी की तलाश में जंगलों में भटककर दम तोड़ चुके है अथवा हादसों या हिंसक श्वानों का शिकार बन चुके है। इसी को लेकर ओरण में रखवाई गई खेलियों में टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जा रही है।