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डिजिटल नेटवर्क से साजिश का खुलासा, जैसलमेर निवासी आरोपी मास्टरमाइंड

सरहदी क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों ने एक स्लीपर सेल का खुलासा किया है। गौरतलब है कि संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर गत 24 मार्च की रात भारेवाला क्षेत्र से 29 वर्षीय आरोपी राजूराम गोदारा को हिरासत में लिया गया था।

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सरहदी क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों ने एक स्लीपर सेल का खुलासा किया है। गौरतलब है कि संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर गत 24 मार्च की रात भारेवाला क्षेत्र से 29 वर्षीय आरोपी राजूराम गोदारा को हिरासत में लिया गया था। पूछताछ में सामने आया कि वह विदेशी हैंडलर्स के संपर्क में रहकर देश-विरोधी गतिविधियों की योजना बना रहा था। जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि आरोपी जैसलमेर के नाचना थाना क्षेत्र का निवासी है और सामान्य जीवनशैली के बीच डिजिटल माध्यम से नेटवर्क संचालित कर रहा था।

टेलीग्राम प्लेटफॉर्म के जरिए वह उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में सक्रिय युवाओं को निर्देश देता था। टेलीग्राम से देता था देशभर में निर्देश, वीडियो के बदले मिलती थी ऑनलाइन रकम शुरुआत में आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए ‘सैयद’ नाम का उपयोग किया, लेकिन पूछताछ में वास्तविक पहचान सामने आई। मार्च और अप्रेल के दौरान उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में हुई आगजनी की घटनाओं का संबंध इसी नेटवर्क से जुड़ा पाया गया। गत 4 मार्च को कीरतपुर क्षेत्र में एक पिक-अप वाहन को पेट्रोल डालकर जलाने की घटना के बाद जांच में यह साजिश उजागर हुई। जांच में सामने आया कि घटनाओं के वीडियो टेलीग्राम पर भेजने के बदले आरोपियों को ऑनलाइन या हवाला माध्यम से भुगतान किया जाता था।

मोबाइल में मिले हथियारों के वीडियो व तस्वीरें

फॉरेंसिक जांच में आरोपी के मोबाइल से हथियारों की तस्वीरें, आपत्तिजनक वीडियो और विभिन्न स्थानों पर अशांति फैलाने से जुड़ीचैट बरामद हुई हैं। मामले में पहले गिरफ्तार अबूजर शमीम, जैद, मन्नान और समीर के मोबाइल से भी आरोपी का संपर्क सामने आया, जिसमें उसका नंबर ‘सैयद’ नाम से सेव था। जांच एजेंसियों के अनुसार यह नेटवर्क जनवरी 2026 से सक्रिय था और इसके तार सऊदी अरब तथा दक्षिण अफ्रीका से जुड़े पाए गए हैं। नेटवर्क में 15 से 20 सदस्य सक्रिय थे, जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को जोड़ते थे और उन्हें ‘सॉफ्टटारगेट’ पहचानने के निर्देश दिए जाते थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए एनआइए और एटीएस जांच में जुटी हैं। सभी आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। सीमावर्ती क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है और संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।