जैसलमेर

JAISALMER NEWS – भारत में बनी इस तबाही मचाने वाली मिसाइल ने इतना अंदर जाकर लक्ष्य भेद फहराया परचम

‘परीक्षा’ में पास ‘स्मर्च’ , 90 किलोमीटर तक जाकर लक्ष्य को भेदा
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-पोकरण फिल्ड फायरिंग रेंज में परीक्षण, रूस की तकनीक से भारत में तैयार मिसाइल
जैसलमेर. भारतीय सुरक्षा को लगातार मजबूत बनाने की दिशा में किए जा रहे कार्यों की साक्षी बनी पोकरण फिल्ड फायरिंग रेंज में भारत-रूस के संयुक्त प्रयासों से विकसित स्मर्च मिसाइल का वहां सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया है। रुस की तकनीक से भारत में निर्मित इस मिसाइल ने 90 किलोमीटर दूरी पर स्थापित लक्ष्य को भेद दिया। गत साल भी स्मर्च मिसाइल का यहां परीक्षण किया गया था, जिसमें वह लक्ष्य से भटक गई थी और एक बड़ा हादसा होते-होते बच गया।
दो संस्करणों का किया गया परीक्षण
सूत्रों के अनुसार पोकरण रेंज में भारतीय सेना और रूसी वैज्ञानिकों की मौजूदगी में स्मर्च के दो नए संस्करणों 9 एमएमएफ और 9.55 के का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया।जो सफल भी रहा। बताया जाता है कि इस मिसाइल के कुल पांच संस्करण हैं। सूत्रों ने कहा कि इस प्रणाली को फायरिंग रेंज पर विभिन्न मानकों पर जांच की जा रही है और मिसाइल ने 90 किलोमीटर पर लक्ष् य को सफलतापूर्वक पूरा किया।

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पहले दिशा भटक गई थी मिसाइल
सूत्र बताते हैं कि गत साल स्मर्च मिसाइल का पोकरण रेंज में किया गया परीक्षण कामयाब नहीं रहा था और वह लांच होने के बाद दिशाभटक गई थी। तब मिसाइल मोहनगढ़ क्षेत्र के एक आबादी गांव में जाकर गिरी थी। गनीमत रही कि उस समय कोई इंसान या पशुधन वहां नहीं था और मिसाइल के गिरने से गांव में बड़ा गड्ढ़ा बन गया था। इसके बाद वैज्ञानिकों ने इसमें आवश्यक संशोधन किए।इस बार रूस के वैज्ञानिकों सहित अन्य विशेषज्ञों की एक टीम पोकरण फिल्ड फायरिंग रेंज पहुंची और में स्मर्च के अपग्रेड किए गए संस्करण के फायरिंग परीक्षणों के समय मौजूद रही।
भारत-रूस के बीच हुआ समझौता
जानकारी के अनुसार साल 2012 में भारत और रूस के बीच हथियारों के निर्माण के संबंध में एक समझौता हुआ। जिसके अंतर्गत रूस की तकनीक से अत्याधुनिक हथियार प्रणाली का निर्माण भारत में करने का निर्णय लिया गया। वर्तमान में कानपुर में ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड (ओएफबी) में स्मर्च मिसाइल का निर्माण किया जा रहा है। इस मिसाइल में फायरिंग के बाद दिशा बदलने की सुविधा भी होगी। युद्ध के समय, यदि सेना को पता चलता है कि मिसाइल दूसरी दिशा में चली गई है तो यह रिमोट कंट्रोल के माध्यम से दिशा बदल सकती है। कानपुर में बने स्टेबलाइजर पक्षी के पंखों के रूप में काम करेंगे और इसके बिना मिसाइल नहीं चलेगी।
इधर भी चल रहा कार्य
सूत्रों ने बताया कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की ओर से मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर पिनाका मार्क-3 पर भी काम कर रहा है। पिनाका मार्क-2 की क्षमता जहां 60 किलोमीटर रेंज तक मार करने की है वहीं मार्क-3 को और विकसित कर उसकी मारक क्षमता को 90 किलोमीटर तथा उससे भी आगे तक बढ़ाया जा सकता है।जानकारी के अनुसार डीआरडीओ रूसी रॉकेट की तुलना में अधिक रेंज के साथ नए रॉकेट विकसित करने की योजना बना रहा है।

Published on:
10 Jun 2018 02:14 pm