
जैसलमेर. होली के बाद गणगौर महोत्सव के आगाज के साथ महिलाओं ने गवर व ईशर की उपासना शुरू कर दी है। पति के जीवन की डोर लंबी और मजबूर बनने के साथ जीवनपर्यन्त साथ बना रहे इसके लिए पीपल के पेड़ के नीचे उपासना कर रही है। इन दिनों एतिहासिक गड़ीसर सरोवर के किनारे लगे पीपल के पेड़ के नीचे महिलाओं का जमघट देखा जा सकता है। घर से पवित्र होकर महिलाएं सोलह श्रृंगार कर सरोवर पर पहुंच रही है और यहां के जल से पीपल की जड़ को सींच कर वृक्ष के आगे दीप प्रज्वलित कर पूजा अर्चना कर रही है। कुछ ऐसा ही नजारा अभी गणगौर पर्व तक चलेगा। रविवार को यहां महिलाओं की संख्या में बढ़ोतरी होती है, जिससे इन दिनों महिलाओं व कन्याओं की रेलमपेल सरोवर पर देखी जा सकती है। गड़ीसर पर आस्था के साथ लोक संस्कृति की झलक बिखरने लगी है। गवर व ईशर के पारम्परिक गीत इन दिनों यहां गूंज रहे है। जिससे माहौल अलग तरह से बन गया है।
भंवर म्हाने पूजण द्यो गणगौर.....
जैसलमेर . होली पर्व की विदाई के साथ ही जैसलमेर में गणगौर पर्व को लेकर उत्साह व उल्लास के साथ भक्तिमय माहौल देखने को मिल रहा है। जैसलमेर में इन दिनों कलक्ट्रेट मार्ग, गड़ीसर मार्ग, मुक्तेश्वर मंदिर मार्ग, नगरपरिषद रोड, गोपा चौक आदि मार्गों पर मंगल गीत गाती युवतियों को समूह में पूजन करने के लिए पैदत जाते देखा जा सकता है। सुबह होते ही मंगलगीत गाती युवतियां सिर पर मंगल कलश लिए आठ कपट री इण्डोणी, भंवर म्हाने पूजण द्यो गणगौर व संदेशड़े रा फूल तोड़्या जैसे गणगौर के भक्ति गीत और मंगल गीत गाती विभिन्न मंदिरों में पहुंचती है। इसके बाद शुरू होता है फल चुनने, पीपल पूजन करने व सूर्यदेव के अघ्र्य देने का दौर। इन दिनों सदा सुहागिन बनने व परिवार की खुशहाली की कामना लिए महिलाएं 16 दिवसीय गणगौर व्रत का निर्वाह कर रही हैं। गणगौर पूजन करने पहुंची युवतियों वर्ष भर इस पावन पर्व का बेसब्री से इंतजार करती हैं। कृपा दृष्टिï प्राप्त करने के लिए ही मन्नतें मांगती हंै। कुंवारी कन्याएं भी सुयोग्य वर की कामना से गणगौर पूजन के लिए व्रत रखती है। शाम को घुड़ला भी निकाला जाता है।