जैसलमेर में 6 से 8 मार्च को तीन दिवसीय चादर महोत्सव और दादागुरु इकतीसा पाठ का आयोजन होगा। तीन दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ शुक्रवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत करेंगे। इसके लिए जैसलमेर के डेडानसर मैदान को सजाया-संवारा गया है। मैदान में पहले दिन आयोजित धर्मसभा को संघ प्रमुख भागवत संबोधित करेंगे।
जैसलमेर में 6 से 8 मार्च को तीन दिवसीय चादर महोत्सव और दादागुरु इकतीसा पाठ का आयोजन होगा। तीन दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ शुक्रवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत करेंगे। इसके लिए जैसलमेर के डेडानसर मैदान को सजाया-संवारा गया है। मैदान में पहले दिन आयोजित धर्मसभा को संघ प्रमुख भागवत संबोधित करेंगे। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण 7 मार्च को विश्वभर में एक साथ 1 करोड़ 8 लाख श्रद्धालुओं की ओर से किया जाने वाला सामूहिक दादागुरु इकतीसा पाठ का ऐतिहासिक महासंकल्प है। कार्यक्रम का आयोजन दादा गुरुदेव श्री जिनदत्तसुरि चादर महोत्सव समिति के अंतर्गत हो रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद, हिन्दू आध्यात्मिक एवं सेवा संस्थान, विद्या भारती तथा अनेक सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधि कार्यक्रम में सहभागी हैं। कार्यक्रम गच्छाधिपति आचार्य मणिप्रभ सूरी की निश्रा में सम्पन्न होगा। इस विराट महोत्सव के प्रेरणास्रोत आचार्य जिनमनोज्ञ सागर हैं। चादर महोत्सव समिति के चेयरमैन महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा एवं संयोजक जीतो के पूर्व चेयरमैन तेजराज गोलेछा हैं।
चादर महोत्सव समिति के चेयरमैन मंगल प्रभात लोढ़ा के अनुसार यह अभियान केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर आस्था, एकता और आध्यात्मिक जागरण का महाअभियान है। दादा गुरूदेव जिनदत्तसुरि चादर महोत्सव में 871 वर्षों बाद पहली बार चादर का विधिवत अभिषेक होगा, इससे पहले जैसलमेर किले से भव्य वरघोड़े के साथ चादर को महोत्सव स्थल पर लाया जाएगा। 8 मार्च को उपाध्याय महेन्द्रसागर महाराज को आचार्य पद प्रदान किया जाएगा।
आयोजन समिति के सचिव पदम टाटिया ने बताया कि चादर महोत्सव के पहले दिन 6 मार्च को महोत्सव की शुरूआत गच्छाधिपतिश्री, आचार्य, उपाध्याय सहित भगवंतों के मंगल प्रवेश से होगी। इसके बाद आयोजित धर्मसभा में सरसंघचालक मोहन भागवत मौजूद रहेंगे। इस अवसर पर चादर समारोह सिक्का और विशेष डाक टिकट का विमोचन होगा। शाम को पहली बार दादा गुरूदेव के जीवन पर आधारित जीवंत नाटिका का मंचन होगा। 7 मार्च को जैसलमेर किले से चादर वरघोड़ा निकलेगा। इसके बाद 1 करोड़ 8 लाख श्रद्धालु पूरे विश्व में दादा गुरु इकतीसे का पाठ करेंगे। दोपहर में चादर अभिषेक और पूजा होगी। सांस्कृतिक संध्या में संगीतकार भक्ति महोत्सव में अपनी प्रस्तुति देंगे। उपाध्याय मनितप्रभ सागर की ओर से लिखित द यूनिवर्सल ट्रूथ एवं डॉ विद्युत्प्रभा श्रीजी की पुस्तक गुरुदेव का विमोचन होगा। इसी तरह 8 मार्च को अखिल भारतीय श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ महासंघ तथा अखिल भारतीय खरतरगच्छ प्रतिनिधि महासभा के तत्वावधान में विशिष्ट कार्यक्रम का आयोजन होगा। उपाध्याय महेन्द्रसागर महाराज को आचार्य पद प्रदान किया जाएगा। साथ ही गणिनी पद समारोह भी आयोजित होगा। इसी दिन चादर अभिषेक जल और वासक्षेप को वितरण होगा।
जैसलमेर जैन ट्रस्ट के अध्यक्ष महेंद्र सिंह भंसाली के अनुसार प्रथम दादागुरु आचार्य जिनदत्त सूरी 11वीं शताब्दी के महान आध्यात्मिक आचार्य माने जाते हैं। परंपरा अनुसार अजमेर में राजा अर्णोराज द्वारा प्रदत्त भूमि पर उनका अग्नि-संस्कार हुआ, जहां अग्नि-संस्कार के समय चादर का नहीं जलना एक अलौकिक घटना के रूप में प्रतिष्ठित हुआ, जो आज भी श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र है। ऐतिहासिक उल्लेख के अनुसार लगभग डेढ़ शताब्दी पूर्व जैसलमेर के महारावल ने महामारी शमन हेतु अनहिलपुर पाटन से यह चादर मंगवाई थी। वर्तमान में यह चादर जैसलमेर दुर्ग स्थित श्री जिनभद्र सूरी ज्ञान भंडार में सुरक्षित है। इसी परंपरा के आधार पर चादर महोत्सव आयोजित किया जाता है। कार्यक्रम के दौरान 7 और 8 मार्च को भारत की सांस्कृतिक एकात्मता, सामाजिक सद्भाव एवं समरसता में दादागुरु परंपरा का योगदान विषय पर राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी आयोजित होगी। जिसमें जोधपुर विश्वविद्यालय, राजस्थान विश्वविद्यालय, प्राकृत भारती संस्थान तथा समाज एवं संस्कृति अध्ययन केंद्र सहित कई प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान नॉलेज पार्टनर के रूप में सहभागी होंगे। विभिन्न आचार्यों, जैन साधु साध्वियो और विषय विशेषज्ञों की मौजूदगी रहेगी।