जैसलमेर

jaisalmer: तीन और गोडावण प्राकृतिक आवास के लिए जंगल में छोड़े

डेजर्ट नेशनल पार्क में संकटग्रस्त राज्य पक्षी गोडावण संरक्षण की मुहिम को नई सफलता मिली है। कैप्टिव ब्रीडिंग कार्यक्रम के तहत तीन और गोडावणों को सुदासरी क्षेत्र में प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया। सैटेलाइट टैग से लैस इन पक्षियों की गतिविधियों पर वैज्ञानिक नजर रखेंगे, जंगल में छोड़े गए गोडावणों की संख्या सात हुई।
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Updated: 7 Nov 2026, 8:29 PM IST
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जैसलमेर. प्राकृतिक आवास में छोड़े जा रहे गोडावण।

जैसलमेर. मरुस्थल की पहचान और संकटग्रस्त राज्य पक्षी गोडावण के संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क में कैप्टिव ब्रीडिंग कार्यक्रम के तहत 3 और गोडावणों को जंगल के प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया गया है। इसके साथ ही जंगल में छोड़े गए कैप्टिव ब्रीड गोडावणों की संख्या बढकऱ 7 हो गई है। करीब 6 माह की उम्र के इन पक्षियों को सुदासरी क्षेत्र में निर्धारित प्रक्रिया के तहत जंगल में छोड़ा गया। इस पूरी कवायद का उद्देश्य कृत्रिम परिवेश में जन्मे और पले गोडावणों को प्राकृतिक आवास में रहने तथा स्वतंत्र रूप से जीवनयापन करने के लिए तैयार करना है। गौरतलब है कि गोडावण संरक्षण के इस अभियान में राजस्थान वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआइआइ) के वैज्ञानिक संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं। तीनों पक्षियों को जंगल में छोडऩे से पहले उनके शरीर पर सैटेलाइट टैग लगाए गए हैं। इनकी मदद से वैज्ञानिक जंगल में पक्षियों की गतिविधियों, उनके विचरण क्षेत्र और व्यवहार पर नजर रख सकेंगे। इससे यह भी पता चल सकेगा कि प्राकृतिक वातावरण में पहुंचने के बाद ये पक्षी किस तरह स्वयं को परिस्थितियों के अनुरूप ढाल रहे हैं।

सॉफ्ट रिलीज तकनीक अपनाई

गोडावणों को सीधे खुले जंगल में छोडऩे के बजाय सॉफ्ट रिलीज तकनीक अपनाई गई है। इसके तहत पक्षियों को सुदासरी क्षेत्र में बनाए गए विशेष बाड़े में रखा गया और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया। इस तकनीक का मकसद कृत्रिम परिवेश में पले पक्षियों को अचानक खुले वातावरण में डालने के बजाय धीरे-धीरे प्राकृतिक परिस्थितियों से परिचित कराना है। सैटेलाइट टैग से मिलने वाली जानकारियां उनके व्यवहार और अनुकूलन क्षमता को समझने में मददगार साबित होंगी। इसके आधार पर भविष्य में छोड़े जाने वाले अन्य गोडावणों की रणनीति भी तय की जा सकेगी। गौरतलब है कि गत अक्टूबर की शुरुआत में पहले चरण में 4 कैप्टिव ब्रीड गोडावणों को जंगल में छोड़ा गया था। इनमें से एक पक्षी की मरुस्थलीय लोमड़ी के हमले में मौत हो गई थी। इस घटना के बाद वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों के सामने जंगल में छोड़े गए पक्षियों की सुरक्षा और प्राकृतिक परिस्थितियों में उनकी जीवित रहने की क्षमता को लेकर सवाल खड़े हुए थे। इसके बाद अभियान की सुरक्षा व्यवस्था और प्रोटोकॉल की समीक्षा की गई। पायलट प्रोजेक्ट के पहले चरण में कुल 11 कैप्टिव ब्रीड गोडावणों को प्राकृतिक आवास में छोडऩे का लक्ष्य बनाया गया है।

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7 Nov 2026, 8:29 PM IST
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